केरल की मंजेरी सेशंस कोर्ट ने मात्र 10 एमएल शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार एक व्यक्ति को जमानत देते हुए पुलिस पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामले दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में नहीं, बल्कि सिर्फ 'बनाना रिपब्लिक' में ही हो सकते हैं। बता दें कि गिरफ्तार व्यक्ति पेशे से नाई था।
न्यायाधीश के. सनील कुमार ने जांच अधिकारी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला देखकर यह संदेह होता है कि आरोपी को फंसाने के पीछे असल मंशा क्या थी। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी के पास मिली 10 एमएल विदेशी शराब संभवतः ग्राहकों के लिए आफ्टरशेव के रूप में रखी गई होगी।
जज ने यह भी पूछा कि इतनी कम मात्रा से नमूना लेना और जांच करना आखिर कैसे संभव था। उन्होंने कहा कि यह साफ है कि जांच अधिकारी ने अपनी सीमाएं लांघीं। ऐसे घटनाक्रम का किसी लोकतांत्रिक देश में कोई स्थान नहीं, यह तो केवल किसी 'बनाना रिपब्लिक' में हो सकता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस बल के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले में जांच अधिकारी को संवेदनशील बनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए, खासकर जब मामला समाज के कमजोर तबके से जुड़े व्यक्ति का हो। अदालत ने आरोपी को 10 हजार रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों के साथ रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही यह शर्त लगाई कि वह सबूतों या गवाहों से छेड़छाड़ नहीं करेगा। साथ ही जमानत अवधि में किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं होगा।
आरोपी ने अपनी जमानत याचिका में दलील दी थी कि अबकारी अधिनियम के तहत व्यक्ति को निजी उपयोग के लिए तीन लीटर तक विदेशी शराब रखने की सामान्य अनुमति है।
बनाना रिपब्लिक किसे कहते हैं?
बनाना रिपब्लिक शब्द का इस्तेमाल किसी ऐसे देश के लिए किया जाता है, जहां राजनीतिक स्थिरता कम हो और तानाशाही शासन हो। बता दें कि यह शब्द सबसे पहले 1900 के दशक में अमेरिकी लेखक ओ हेनरी ने इस्तेमाल किया था।