पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे नामुकिन को मुमकिन करते हुए भारत ने चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिग कराई। इसका उदाहरण देते हुए केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने गुरुवार को कहा कि देश में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। आगे कहा कि भारत आज चांद के दक्षिणी ध्रुव को छूने वाला पहला देश बन गया है लेकिन इसके बाद भी देश के कई हिस्से अभी भी अंधविश्वास की चपेट में हैं।
संत सुधारक श्री नारायण गुरु की 169वीं जयंती के अवसर पर वे चेम्पाझांती में एक बैठक के उद्घाटन के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने सवाल किया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति के बावजूद, देश लोगों के बीच वैज्ञानिक जागरूकता पैदा करने में असमर्थ क्यों है? भारत के चांद पर पहुंचने के बावजूद देश के कई हिस्सों में अंधविश्वास के नाम पर मानव बलि और हिंसा हो रही है।
उन्होंने कहा कि हमें इसका मूल्यांकन करने की आवश्यकता है। सीएम ने यह भी कहा कि पाठ्यपुस्तकों में विकासवाद के सिद्धांतों की जगह अवैज्ञानिक चीजें ले रही हैं। दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, आपदाएँ और दंगे हो रहे हैं और भारत में भी लोगों को नस्ल, जाति या धार्मिक मतभेदों के आधार पर एक-दूसरे को मार रहे हैं।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मणिपुर और हरियाणा में चल रही हिंसा का हवाला देते हुए कहा कि लोगों के बीच विभाजन और जो नफरत इन दोनों राज्यों में देखी जा रही है, वह हाल ही में उत्तर प्रदेश के एक स्कूल की कक्षा में भी देखी गई। उन्होंने कहा कि मणिपुर और हरियाणा में नफरत की आग अभी भी जल रही है और यह हमें दुनिया के सामने शर्म से सिर झुकाने पर मजबूर कर रही है।
सीएम पिनाराई विजयन ने आगे कहा कि सांप्रदायिक ताकतें अपनी विभाजनकारी राजनीति के माध्यम से देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और लोगों के बीच एकता को नष्ट करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को सांप्रदायिक ताकतों द्वारा उत्पन्न चुनौतियों पर काबू पाने का प्रयास करना चाहिए और नारायण गुरु के दृष्टिकोण और संघर्षों से ताकत लेकर गुरु की कल्पना के अनुसार एक समाज बनना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि गुरु के दर्शन और संदेश समय के साथ मिटे नहीं हैं और वे केवल और अधिक मजबूत हो गए हैं क्योंकि वे मानवता को लाभान्वित करते हैं। सीएम ने कहा कि श्री नारायण गुरु जैसे आध्यात्मिक नेताओं और समाज सुधारकों के हस्तक्षेप और गतिविधियों के कारण केरल आज ऐसा बन गया है। उन्होंने सामाजिक प्रगति के लिए शिक्षा की आवश्यकता को महसूस किया। श्री नारायण गुरु ने 'मानव जाति के लिए एक जाति, एक धर्म और एक ईश्वर' का संदेश प्रचारित किया था।