फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केरल सचिव नियुक्ति विवाद: सीएम सतीशन ने खुद का किया बचाव, कहा- केलकर की नियुक्ति सांविधानिक

Mon, 25 May 2026 03:14 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, तिरुवनंतपुरम।

सार

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के प्रशासनिक फैसले और धार्मिक दौरे इस समय कड़े राजनीतिक विरोध के घेरे में हैं। एक तरफ जहां सरकार इसे सामान्य प्रक्रिया और नियमों के तहत उठाया गया कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सत्ता के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन के रूप में भुनाने में जुटा है।
 
विज्ञापन
वीडी सतीशन, मुख्यमंत्री, केरल - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन इस समय दो बड़े राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। पहला मामला उनके सचिव के रूप में मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर की नियुक्ति का है। दूसरा विवाद उनके गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर दौरे से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने जहां अपनी सरकार के फैसले का मजबूती से बचाव किया है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे लेकर हमले शुरू कर दिए हैं।
विज्ञापन


सचिव की नियुक्ति पर मुख्यमंत्री का पलटवार
मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने पूर्व सीईओ रतन यू केलकर को अपना सचिव बनाए जाने के फैसले का पुरजोर समर्थन किया। माकपा और भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले केरल के किसी भी राजनीतिक दल ने केलकर के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की थी।

सतीशन ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति एक मानक सांविधानिक प्रक्रिया के तहत होती है। इसमें राज्य सरकार अधिकारियों का एक पैनल भेजती है और मुख्य चुनाव आयुक्त अंतिम चयन करते हैं। उन्होंने इस विवाद के आधार पर ही सवाल उठा दिए। मुख्यमंत्री ने पूर्व सीईओ नलिनी नेट्टो का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि नलिनी नेट्टो बाद में गृह विभाग में रहीं, मुख्य सचिव बनीं और मुख्यमंत्री कार्यालय में भी सेवाएं दीं। सतीशन ने पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कांग्रेस और माकपा जैसे दलों ने मतदाता सूची से नाम हटाने के गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन केरल में केलकर के खिलाफ ऐसी कोई शिकायत नहीं थी।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: मुनंबम भूमि विवाद: 'नहीं होगी बेदखली', केरल के CM सतीशन का एलान; वक्फ बोर्ड पहले ही करा चुका जमीन का पंजीकरण

गुरुवायूर मंदिर में वीआईपी दर्शन पर छिड़ा नया विवाद
इस प्रशासनिक विवाद के बीच मुख्यमंत्री के गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर के दौरे ने एक नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने वीआईपी दर्शन पर लगे केरल उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया है। इससे आम श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री रविवार सुबह मंदिर पहुंचे थे। वहां उन्होंने पूजा-अर्चना की और पारंपरिक तुलाभारम रस्म भी निभाई।

भाजपा के वरिष्ठ नेता बी गोपालकृष्णन ने गुरुवायूर देवस्वोम प्राधिकरण में इस संबंध में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि रविवार सुबह प्रतिबंधित घंटों के दौरान मुख्यमंत्री और उनके साथ आए नेताओं को विशेष वीआईपी दर्शन की सुविधा दी गई। उनके अनुसार, हाईकोर्ट ने रविवार को सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे के बीच वीआईपी दर्शन और मंदिर परिसर में वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी पर पूरी तरह रोक लगा रखी है।

देवस्वोम बोर्ड की सफाई
भाजपा नेता का आरोप है कि मुख्यमंत्री के दल ने विशेष दर्शन के लिए जरूरी 4,500 रुपये की 'श्रीकोविल नेयविलक्कु' रसीद भी नहीं ली थी। इसके अलावा, कांग्रेस सांसद हिबी ईडन और अन्य नेताओं पर मंदिर परिसर में अवैध रूप से वीडियो रिकॉर्ड करने का आरोप लगाया गया है।
विज्ञापन


हालांकि, मंदिर का प्रबंधन देखने वाले गुरुवायूर देवस्वोम ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। देवस्वोम ने फेसबुक पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री का दर्शन पूरी तरह नियमों के मुताबिक था। उन्होंने छुट्टी का दिन होने के कारण निर्धारित 4,500 रुपये की रसीद कटवाई थी। देवस्वोम के अध्यक्ष ए वी गोपीनाथ ने कहा कि प्रथम दृष्टया मुख्यमंत्री की तरफ से किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। हालांकि, उन्होंने माना कि आम श्रद्धालुओं को परेशानी होने की शिकायतें मिली हैं, जिसकी जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री वहां राजस्व मंत्री ए पी अनिल कुमार के बेटे की शादी में शामिल होने भी गए थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें