केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पर निशाना साधा। उन्होंने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को कम्युनिस्ट विरोधी दुष्प्रचार करने वाला तक कह डाला। विजयन ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पर आरएसएस के प्रति निष्ठा दिखाने का आरोप भी लगाया।
विजयन ने पार्टी के एक कार्यक्रम में कहा कि कम्युनिस्ट विरोधी प्रचारक खान को यह समझना चाहिए कि राज्य में 1957 में सत्ता में आने से पहले कम्युनिस्टों का दमन किया गया था। विजयन ने कहा कि राज्यपाल का पद एक संवैधानिक जिम्मेदारी है, न कि वह पद जिससे कोई व्यक्तिगत राय व्यक्त की जा सकती है।
विजयन ने आरोप लगाया कि आरएसएस की विचारधारा इटली में प्रचलित फासीवाद और साम्यवाद, ईसाई धर्म और इस्लाम के खिलाफ एडॉल्फ हिटलर के विचारों पर आधारित थी। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि आरएसएस इन विचारधाराओं का अध्ययन करने के लिए वहां गया और उन्हें यहां लाया।
संघ प्रतिबंधित नहीं, भागवत से मिलने में क्या दिक्कत : खान
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सोमवार को सवाल किया कि वामदलों को हिंसक विदेशी विचारधारा से वफादारी का हक है, तो वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मित्रतापूर्ण रिश्ते क्यों नहीं रख सकते? खान संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात को लेकर केरल की सत्ताधारी वामपंथी पार्टी की अालोचना का जवाब दे रहे थे। उन्होंने पूछा, संघ कोई प्रतिबंधित संगठन नहीं, लिहाजा भागवत से मिलने में आखिर क्या दिक्कत है?
राज्यपाल ने कहा, संघ से मेरे 1986 से गहरे रिश्ते हैं। देश के कई राज्यपाल संघ के कार्यकर्ता रहे हैं। देश के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था, वे हमेशा खुद को सबसे पहले स्वयंसेवक मानते हैं। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संघ को गणतंत्र दिवस परेड में आमंत्रित किया था। उन्होंने कहा, अगर संघ प्रमुख आसपास होंगे, तो वे फिर मिलेंगे।
शाहबानो मामले में मिला था संघ व वामदल दोनों का साथ
खान ने कहा, 1986 में शाहबानो मामले में संघ ने उनका समर्थन किया था। वह राजीव गांधी की सरकार में राज्यमंत्री थे। संघ के अलावा केरल के पहले सीएम नंबूदरीपाद से भी समर्थन मिला। वामदलों ने 1991 से शरीयत का समर्थन शुरू कर दिया, जबकि संघ आज भी मेरी राय से सहमति रखता है।
संघ प्रमुख से मिले थे राज्यपाल
इससे पूर्व केरल के राज्यपाल खान ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की थी। राज्यपाल ने इसके बारे में मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। राज्यपाल ने सीएम पिनराई विजयन और कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति पर गंभीर आरोप लगाए थे।
राज्यपाल भी लगा चुके सीएम पर आरोप
उन्होंने कहा था कि वह मुझे शारीरिक रूप से चोट पहुंचाने की साजिश में शामिल थे। साथ ही कुलपति पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह एक अपराधी हैं, वह राजनीतिक कारणों से कुलपति बने बैठे हैं। मुझे कुलपति ने वहां आमंत्रित किया था। जब मुझ पर हमला किया गया तो उनका कर्तव्य क्या था कि उनको पुलिस में सूचना नहीं देनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।