कयास लग रहे हैं कि कांग्रेस केरल में किसको मुख्यमंत्री बनाएगी। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, विधानसभा में नेता विपक्ष वी.सतीशन और कांग्रेस महासचिव रमेश चेनीथला के नाम सबसे आगे लिए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि ये फैसला पूरी तरह राहुल गांधी के मुताबिक होगा और इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की राय भी अहम होगी। जहां तक राहुल गांधी का सवाल है तो उनके नजदीकी सूत्रों के मुताबिक राहुल ने फैसला कर लिया है कि जिस नाम पर विधायकों में सहमति होगी उसी के सिर पर ताज सजेगा। राहुल ने अपनी राय से तिरुअनंतपुरम जाने वाले पार्टी पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन को अवगत करा दिया है। साथ ही ये भी कहा है कि वो इस बात का प्रयास करें कि आम सहमति से फैसला हो तो ज्यादा बेहतर होगा।
वेणुगोपाल के नाम पर फंस सकता है पेंच
दिलचस्प बात ये है कि कांग्रेस के कई केंद्रीय नेता चाहते हैं कि के.सी.वेणुगोपाल को केरल का मुख्यमंत्री बनाकर भेज दिया जाए जिससे यहां उनकी जगह खाली हो और किसी ज्यादा परिपक्व नेता को संगठन महासचिव की जिम्मेदारी दी जाए लेकिन राहुल गांधी के करीबी सूत्रों का कहना है कि जिस नेता को पिछले पांच साल से राहुल ने अपने विश्वासपात्र के रूप में विकसित किया और अब जब पार्टी संगठन पर वेणुगोपाल की पकड़ मजबूत हो गई है तो राहुल उन्हें केरल क्यों जाने देंगे। इसके अलावा जीते हुए विधायक दिल्ली से किसी नेता को थोपे जाने के पक्ष में नहीं हैं। वो अपने बीच के किसी अनुभवी नेता को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं।
यूडीएफ गठबंधन की सरकार को बेहतर ढंग से चलाते हुए दस साल से वाम मोर्चे की सरकार के समय हुए खालीपन को कांग्रेस के पक्ष में बेहतर तरीके से भर सके। वेणुगोपाल के खिलाफ एक बात और कि उनके खिलाफ एक मामले में आरोप है जिसको लेकर उन पर कभी भी दबाव बनाया जा सकता है।
वीडी सतीशन के हक में जाती है ये बात
दूसरे दावेदार वीडी सतीशन जो पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे उनके हक में उनका अपेक्षाकृत युवा होना है लेकिन पिछले दिनों उनकी मंगलूरू यात्रा और वहां जद(एस) के कुछ नेताओं से हुई कथित मुलाकात को लेकर खासी चर्चा रही है। पार्टी हाईकमान तक ये बात पहुंचाई गई है कि जिस चार्टड फ्लाईट से सतीशन मंगलौर गए उस विमान का मालिक एक विवादित शख्स है। जबकि रमेश चेनीथला जो सबसे वरिष्ठ नेता हैं और जिन्हें संगठन और सरकार का सबसे ज्यादा अनुभव है उनकी दावेदारी को भी अनदेखा करना मुश्किल है। कांग्रेस के ज्यादातर वरिष्ठ नेता मानते हैं कि रमेश जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे और राज्य में यूडीएफ की सरकार बनी थी तब उनकी जगह वरिष्ठता के कारण ओमन चांड़ी को मुख्यमंत्री बना दिया गया था। वही स्थिति अब रमेश की है।राजीव गांधी के बेहद विश्वासपात्र रहे रमेश को सोनिया गांधी का भी भरोसा हासिल है।
शशि थरूर के नाम की भी चर्चा
कांग्रेस के भीतर चर्चा है कि केसी वेणुगोपाल अगर मुख्यमंत्री नहीं बनते हैं तो उनका समर्थन चेनीथला को हो सकता है क्योंकि रमेश के बाद वेणुगोपाल राज्य की राजनीति में अपना भविष्य सुरक्षित देखते हैं जबकि सतीशन जो वेणुगोपाल से कम उम्र के हैं अगर मुख्यमंत्री बन गए तो फिर केरल की राजनीति में वह सबसे बड़ा चेहरा हो जाएंगे और लंबे समय तक रहेंगे। एक नाम शशि थरूर का भी लिया जा रहा है लेकिन थरुर और वेणुगोपाल दोनों ही लोकसभा में सांसद हैं और कांग्रेस अपने किसी सांसद को भेजकर उपचुनावों का जोखिम लेना नहीं चाहेगी।
राहुल गांधी ही लगाएंगे आखिरी मुहर
कुल मिलाकर आखिरी मुहर राहुल गांधी की लगेगी और राहुल का मानना है कि विधायकों की राय सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने यही रुख कर्नाटक और तेलंगाना में भी अपनाया था और 2018 में राजस्थान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ में जब राहुल कांग्रेस अध्यक्ष थे तब भी विधायकों की राय के आधार पर ही अशोक गहलौत कमलनाथ और भूपेश बघेल को तरजीह दी गई थी। सिर्फ पंजाब जहां अमरिंदर सिंह के हटने के बाद विधायकों का बहुमत सुनील जाखड़ के पक्ष में था लेकिन दलित कार्ड के चक्कर में चरणजीत सिंह चन्नी को बनाया गया और नतीजा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के रूप में सामने आया। इसके बाद नाराज सुनील जाखड़ भाजपा में चले गए थे। इसलिए अब विधायकों की राय को ही तरजीह मिलने की संभावना सबसे ज्यादा है।