375 करोड़ रुपये के एसएनसी लावलिन घोटाले और सोने की तस्करी में शामिल होने के आरोप झेलने के बावजूद केरल की वाम मोर्चा सरकार यदि विधानसभा चुनाव में मजबूती से लड़ती दिखाई दे रही है तो इसकी बड़ी वजह विपक्ष का कमजोर होना है।
मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस चुनाव के दौरान वरिष्ठ नेता पीसी चाको के इस्तीफे से और कमजोर हुई है। 50 वर्ष कांग्रेस में बिताने के बाद इस्तीफे में चाको ने आरोप लगाया कि पार्टी नेता विपक्षी दल रमेश चेन्निथला और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के खेमों में बंटी है।
चाको के मुताबिक कांग्रेस के सभी उम्मीदवार या तो चांडी खेमे के हैं या चेन्निथला खेमे के। ऐसे में उनके या पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी जैसे निष्पक्ष नेताओं के लिए पार्टी मे जगह नहीं बची है। यही वजह है कि केरल के इतिहास में 1997 के बाद दूसरी बार सत्ताधारी गठबंधन चुनाव में जीत हासिल कर सकता है। पिछले वर्ष दिसंबर में हुए पंचायत चुनाव में धमाकेदार जीत हासिल करने वाले मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व पर राज्य की जनता मुहर लगा चुकी है।
ये रहे हैं आरोप
पिछले वर्ष पांच जुलाई को त्रिवेंद्रम हवाई अड्डे पर तस्करी का 30 किलो सोना पकड़ा गया। मामले में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर को हटा दिया गया। मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने सोने-डॉलर के तस्करों पर सीएम का वरद हस्त होने का आरोप लगाया है। इसी तरह विजयन पर ऊर्जा मंत्री रहते कनाडा की एनएनसी लावलिन कंपनी से 375 करोड़ रुपये की बेकार मशीनें फरवरी 1997 में आयात करने का आरोप है।
सबरीमाला है मुद्दा
राज्य में तीसरी ताकत बनकर उभरती भाजपा ने प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश निषेध को मुद्दा बनाया है। विजयन सरकार मंदिर में महिलाओं के प्रवेश निषेध की परंपरा एक अदालती आदेश के सहारे खत्म कराना चाहती थी।