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Congress: 'पिता राजीव गांधी की तरह राहुल को भी नहीं थी सियासत में रूचि, फैसलों से न डिगना ताकत'; एंटनी का दावा

Fri, 12 Apr 2024 11:58 PM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

एंटनी ने कहा कि राहुल गांधी को अपने पिता राजीव गांधी की तरह राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है। लेकिन फिर भी वह मैदान में उतरे हुए हैं। उन्हें पीएम तो नहीं बनना  बल्कि भारतीय संविधान की बुनियादी संरचना की रक्षा के लिए भाजपा के खिलाफ लड़ रहे हैं।
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राहुल गांधी, राजीव गांधी और एके एंटनी - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल में शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने राहुल गांधी की तारफों के पुल बांध दिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक दृढ़निश्चयी और साहसी नेता हैं। वह अपने रास्ते में आने वाली विपरीत परिस्थितियों से घबराकर अपने फैसले बदलते नहीं हैं। 

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एंटनी ने कहा कि राहुल गांधी को अपने पिता राजीव गांधी की तरह राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है। लेकिन फिर भी वह मैदान में उतरे हुए हैं। उन्हें पीएम तो नहीं बनना  बल्कि भारतीय संविधान की बुनियादी संरचना की रक्षा के लिए भाजपा के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह भारत में सबसे भरोसेमंद और विश्वसनीय नेता बनते जा रहे हैं।

पुस्तक विमोचन के मौके पर पहुंचे थे एके एंटनी
बता दें कि कांग्रेस के दिग्गज नेता एके एंटनी राहुल गांधी पर अनुभवी मीडियाकर्मी एन अशोकन की किताब के विमोचन के मौके पर  बोल रहे थे। यहां इंदिरा भवन में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए, एंटनी ने अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों को याद किया कि कैसे वह नेहरू परिवार के करीब आए और युवा राहुल गांधी के बारे में उनकी यादें थीं, जिन्हें उन्होंने पहली बार 'शक्ति स्थल' स्मारक पर देखा था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली के राजघाट पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
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देश के लिए बलिदान नेहरू-गांधी परिवार का इतिहास 
एंटनी ने कहा कि देश के लिए बलिदान देना नेहरू-गांधी परिवार का इतिहास रहा है। इंदिरा गांधी और उनके बेटे राजीव दोनों इसके उदाहरण थे। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने अपने सिख अंगरक्षकों को यह बताने के बावजूद हटाने से इनकार कर दिया कि उनसे उनकी जान को खतरा है। 

एंटनी ने कहा, उन्होंने हमारे देश की धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। उन्होंने आगे कहा कि राजीव गांधी को उनकी पत्नी सोनिया गांधी ने बार-बार राजनीतिक जीवन में प्रवेश न करने और कांग्रेस नेतृत्व की कमान संभालने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा किया और बाद में उनकी भी दुखद मृत्यु हो गई। 

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