इस साल यात्रा सीजन की शुरुआत से जुलाई 2025 तक 14 लाख से ज्यादा श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचे, यह संख्या चारों धाम में सबसे अधिक है। वहीं केवल शुरुआती 48 दिनों में ही यात्रा से करीब 300 करोड़ रुपये की आमदनी हुई, जिसमें ट्रांसपोर्ट, आतिथ्य, घोड़े-खच्चर और हेलीकॉप्टर जैसी सेवाएं शामिल हैं।
केदारनाथ धाम में इस साल की यात्रा शुरू होने के सिर्फ तीन महीनों (मई से जुलाई 2025) में जितना कचरा जमा हुआ है, वह साल 2022 के पूरे आंकड़े से ज्यादा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें से ज्यादातर कचरा बिना उपचार के ही बेस कैंप के पास डंप कर दिया गया। यह जानकारी पर्यावरणविद अमित गुप्ता की तरफ से दायर एक आरटीआई के जवाब में नगर पंचायत केदारनाथ ने दी है।
क्या है 2025 का आंकड़ा?
मई से जुलाई तक कुल 17.6 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ। इसमें से केवल 7.1 मीट्रिक टन कचरा ही प्रोसेस या रीसायकल किया जा सका। बाकी 10.5 मीट्रिक टन असंसाधित कचरा नए बने लैंडफिल में फेंक दिया गया। मई में 8.4 टन, जून में 5.6 टन और जुलाई में 3.6 टन कचरा निकला। कचरा प्रोसेसिंग क्षमता अभी भी सीमित है। एक नया मटेरियल रिकवरी सेंटर 278.8 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाया गया है, जिसकी क्षमता 5 टन प्रतिदिन है। इसके अलावा 3.13 करोड़ रुपये की लागत से ठोस और तरल कचरा प्रबंधन संयंत्र बनाने की योजना स्वीकृति के इंतजार में है।
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पिछले तीन वर्षों की स्थिति
आरटीआई से सामने आए आंकड़े बताते हैं कि 2022 से 2024 तक केदारनाथ में 72.53 मीट्रिक टन कचरा पैदा हुआ। इसमें से केवल 32 प्रतिशत ही प्रोसेस हुआ और बाकी बिना उपचार के फेंका गया। इसमें बताया गया कि साल 2022 में कुल 13.85 टन कचरा, लगभग पूरा असंसाधित रहा, वहीं 2023 में 32.58 टन कचरा, जिसमें से 18.48 टन असंसाधित रहा। जबकि साल 2024 में 26.10 टन कचरा, जिसमें से 17.5 टन असंसाधित रहा।
इस दौरान 49.18 टन ऑर्गेनिक कचरा और 23.35 टन इनऑर्गेनिक कचरा पैदा हुआ। हैरानी की बात है कि इतनी बड़ी समस्या के बावजूद इस पूरे समय में न तो कोई शिकायत दर्ज हुई और न ही किसी पर जुर्माना लगाया गया।
पर्यावरणीय खतरा और प्रतिबंध की मांग
पर्यावरणविद अमित गुप्ता का कहना है कि केदारनाथ में अभी भी सही मायनों में कचरा प्रबंधन की सुविधा नहीं है। उनका कहना है, 'हर साल असंसाधित कचरे की मात्रा बढ़ रही है। हम केदारनाथ जी के पवित्र और स्वच्छ वातावरण को धीरे-धीरे नष्ट कर रहे हैं। यहां सिंगल-यूज प्लास्टिक पर सख्ती से प्रतिबंध लागू करने की जरूरत है।'