जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की मासूम बच्ची का बलात्कार और हत्या मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है। इस घटना के बाद पूरे देश में गुस्सा है वहीं दहशत और डर के माहौल में कठुआ की निर्भया के परिवार ने रसाना गांव छोड़ दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक बार एसोसिएशन द्वारा जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाने और विरोध-प्रदर्शन व हड़ताल के बाद पूरा परिवार दहशत में था। बच्ची के पिता अपनी पत्नी, दो बच्चों और पशुओं के साथ किसी अज्ञात जगह पर चले गए हैं।
पहले कहा जा रहा था कि परिवार अगले महीने तक कश्मीर छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। अलगाववादी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मीरवाइज उमर फारुख ने गुरुवार को प्रशासन और पुलिस पर मूकदर्शक होने का आरोप लगाया। जबकि जम्मू बार एसोसिएशन ने भीम सिंह की नेतृत्व वाली पैंथर पार्टी के सहयोग से बलात्कारियों और हत्यारों के समर्थन में शहर में बंद और प्रदर्शन किया। सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने रोंगटे खड़े कर देने वाले इस अपराध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। श्रीनगर के प्रताप पार्क पर छात्र, युवक और स्थानीय लोग भी इकट्ठा हुए थे।
मरने के बाद भी दो गज जमीन पाने के लिए आसिफा को करना पड़ा संघर्ष
बीबीसी को दिए इंटरव्यू में बच्ची के मामा ने बताया- बच्ची को उस कब्रिस्तान में दफनाना चाहते थे, जिसे कुछ सालों पहले उन्होंने रसाना गांव में खरीदी थी। यहां पर वो पांच लोगों को पहले दफना चुके थे लेकिन जैसे ही बच्ची को वहां लाया गया हिंदू कार्यकर्ताओं ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि यदि वह दफन कार्य को जारी रखते हैं तो हिंसा होगी। हमें उसे दफनाने के लिए सात किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ा। बच्ची की मां ने बताया कि बच्ची एक चहकने वाली चिड़ियां थी जो हिरण की तरह भागा करती थी। जब हम कहीं जाते थे तो वह पशुओं का ध्यान रखती थी। वह हमारी दुनिया का केंद्र थी।