केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने अपनी अवमानना के लिए वरिष्ठ वकील महमूद प्राचा को दोषी ठहराया लेकिन उन्हें गंभीर चेतावनी देकर छोड़ दिया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि कैट की प्रधान पीठ ने प्राचा के व्यवहार का उस वक्त स्वत: संज्ञान लिया, जब वह भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामले में उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) के संदर्भ में बहस कर रहे थे।
कैट ने बुधवार को जारी आदेश में कहा, इस मामले में घटे विभिन्न घटनाक्रमों से हम जो जुटा या समझ पाए हैं, वह यह है कि आवेदनकर्ता और उनके वकील के व्यक्तित्व को निखारने की कोशिश अधिक थी और इस उद्देश्य में न्यायाधिकरण आसान लक्ष्य बन गया। प्रतिवादी के दुर्व्यवहार और तिरस्कारपूर्ण व्यवहार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कैट ने प्राचा को अदालतों की अवमानना कानून 1971 की धारा 14 के तहत कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराया।
आदेश में कहा गया है कि प्रतिवादी के खिलाफ अवमानना के लिए सजा सुनाने का हर आधार है। हालांकि इसे पहली घटना मानते हुए हम केवल गंभीर चेतावनी देते हुए छोड़ रहे हैं कि यदि न्यायाधिकरण में फिर से ऐसी कार्यों की पुनरावृत्ति होती है और वह अवमानना के दोषी मिलते हैं तो इस मामले को कार्यवाही का अहम कारक माना जाएगा।