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कश्मीरी पंडितों के लिए घर वापसी की आस जगी, केंद्र का कदम 72 साल पहले की भूल का सुधार है  

Tue, 06 Aug 2019 06:07 AM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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कश्मीरी पंडित (फाइल फोटो)
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जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता का दर्जा देने वाले  अनुच्छेद  370 को रद्द करने के फैसला का कश्मीरी पंडितों ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा 1990 में उजड़े कश्मीरी पंडितों के लिए यह घर वापसी का पहला कदम है। सोमवार की सुबह जैसे ही कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार के बड़े फैसले की खबर आई कश्मीर वापसी की आस छोड़ चुके 75 साल के एम के धर की आंखों में  मानो रौनक  लौट आई।  
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धर के लिए आज का दिन कश्मीर की आजादी का दिन है। बकौल धर यह केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि है, कश्मीर जो शेख अब्दुल्ला की बदनीयती सोच के चलते इस्लामियत की बिगड़ी तस्वीर से बदरंग धब्बा हो गया था। उसके लिए यह फैसला संजीवनी है। बूढ़ी डबडबाई आंखों से 1990 के मंजर को याद करते एम के धर कहते हैं, एक गलती हुई थी, नेहरू से शेख अब्दुल्ला जो कि शुरू से ही इस्लामिक मूवमेंट का पक्षधर था के कहने पर धारा 370 को कश्मीर पर थोपा दिया। जिसे अब सुधारा गया है।  

कश्मीर में बहुत अनिश्चितता का माहौल है।  इस फैसले से स्थायित्व आएगा।  क्योंकि एक बार देश का धर्म के नाम पर बंटवारा स्वीकार कर पिछले सात दशकों से हम धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कश्मीर को आतंक की आग में झोंकते जा रहे हैं। उन्होंने कहा जो गुलाम नबी आज संसद में खड़े होकर इस कदर बेजार हो रहे हैं उन्हें 1990 का मंजर याद करना चाहिए जब उन्होंने मदद के बजाए हमें ऊपर वाले के रहमोकरम का हवाला देकर बेघर होते हुए देखा था।  
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मुझे लगता है कश्मीरी पंडितों की वापसी के साथ अब हम कश्मीर के अमनपंसद लोगों को इस्लामिक मूवमेंट के चंगुल से बचा सकेंगे। विस्थापित कश्मीरियों केलिए पुर्नवास के लिए काम कर रही कल्हन सोसाइटी ग्लोबल साइंटिफिक बॉडी के महासचिव सतीश महलदार ने कहा भाजपा को बधाई श्यामाप्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा हुआ। अब सवाल है कश्मीरी पंडितों की धरोहर और घाटी में उनकी वापसी कब होगी। 

अब गृहमंत्री के सामने यही सबसे अहम मुद्दा है कि कश्मीर में वहां से विस्थापित हुए पंडितों की वापसी क्योंकि जब वहां के रहने वाले लोग ही नहीं  रहेंगे तो सांझी विरासत वाले कश्मीर को कैसे पुर्नवासित किया जाएगा। हम सरकार से  अनुरोध करते हैं कि वह तुंरत ही कश्मीर की जमीन पर खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दे। सरकार प्रावधान करे कि जब तक कश्मीरियों को उनकी जमीने वापस न मिलें। उस जमीन की बिक्री न हो। 

कानून में यह प्रावधान हो वहां केजो मूल बाशिंदे हैं, उन्हें सबसे पहले जमीनों और नौकरियों पर हक मिले बाद में देश के अन्य लोगों को काम करने का मौका मिले। जम्मू-कश्मीर के मंदिरों पर सरकार की तरफ से वक्फ बोर्ड की तर्ज पर कमेटी बनाई जाए जो दो दशक से ज्यादा समय से  हमारे पूजा ग्रहों और ऐतिहासिक मंदिरों को उनके मूल स्वरूप में लाने में मदद करे। कश्मीरी पंडित घर वापसी गैंग के रवि रिगू कहते हैं। 

धारा 370 को खत्म करना एक अच्छा कदम है, लेकिन इससे हमारी वापसी होगी इस पर अभी थोड़ा संशय है। क्योंकि हम चाहते थे हमें वहां भारत सरकार जहां घर बनाकर दे उसमें नहीं अपने घरों को जिन्हें हम 1990 में मजबूरी में छोड़कर आए थे वहीं कहीं आसपास बसने का मौका दे। जिसके लिए हमने वीर वाइज, पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस से बात की थी।  ऐसे में इस फैसले  के बाद अब देखना है हमें हमारी शर्तों पर कब घर जाने को मिलता है।
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