जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फैसला का कश्मीरी पंडितों ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा 1990 में उजड़े कश्मीरी पंडितों के लिए यह घर वापसी का पहला कदम है। सोमवार की सुबह जैसे ही कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार के बड़े फैसले की खबर आई कश्मीर वापसी की आस छोड़ चुके 75 साल के एम के धर की आंखों में मानो रौनक लौट आई।
धर के लिए आज का दिन कश्मीर की आजादी का दिन है। बकौल धर यह केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि है, कश्मीर जो शेख अब्दुल्ला की बदनीयती सोच के चलते इस्लामियत की बिगड़ी तस्वीर से बदरंग धब्बा हो गया था। उसके लिए यह फैसला संजीवनी है। बूढ़ी डबडबाई आंखों से 1990 के मंजर को याद करते एम के धर कहते हैं, एक गलती हुई थी, नेहरू से शेख अब्दुल्ला जो कि शुरू से ही इस्लामिक मूवमेंट का पक्षधर था के कहने पर धारा 370 को कश्मीर पर थोपा दिया। जिसे अब सुधारा गया है।
कश्मीर में बहुत अनिश्चितता का माहौल है। इस फैसले से स्थायित्व आएगा। क्योंकि एक बार देश का धर्म के नाम पर बंटवारा स्वीकार कर पिछले सात दशकों से हम धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कश्मीर को आतंक की आग में झोंकते जा रहे हैं। उन्होंने कहा जो गुलाम नबी आज संसद में खड़े होकर इस कदर बेजार हो रहे हैं उन्हें 1990 का मंजर याद करना चाहिए जब उन्होंने मदद के बजाए हमें ऊपर वाले के रहमोकरम का हवाला देकर बेघर होते हुए देखा था।