गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होते ही रक्तपात के युग के अंत की शुरुआत हो जाएगी। 370 के खात्मे से कश्मीर की समस्या के स्थायी समाधान का रास्ता भी खुल जाएगा। महज भ्रष्टाचार के लिए तीन परिवारों ने 70 साल से 370 पर कश्मीर के साथ-साथ देश को गुमराह किया, जबकि कश्मीर की जनता जम्हूरियत चाहती है। राज्यसभा में चर्चा के दौरान जवाब देते हुए शाह ने भरोसा दिलाया कि जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य होते ही फिर से केंद्र शासित प्रदेश से इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया जाएगा।
अचानक एटम बम नहीं फोड़ा
गुलाम नबी आजाद के अचानक एटम बम फोड़े जाने वाले बयान का जवाब देते हुए गृह मंत्री शाह ने साफ किया कि हमने अचानक कोई बम नहीं फोड़ा। भाजपा के प्रथम अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ही 370 खत्म करने का सपना देखा था। तब से भाजपा हर घोषणा पत्र में 370 खत्म करने का संकल्प दोहराती रही है और इस बार भी हमने यह संकल्प लिया था। यह श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ-साथ जम्मू कश्मीर में मरने वाले 41849 लोगों को श्रद्धांजलि है।
हम धर्म की राजनीति नहीं करते
शाह ने सवाल किया, क्या कश्मीर में सिर्फ मुसलमान रहते हैं। वहां हिंदू भी हैं, बौद्ध भी, जैन धर्म के भी है। ऐसे में अगर 370 मुसलमानों के लिए बुरा है तो वह हिंदुओं, बौद्धों, जैनियों के लिए भी बुरा ही होगा और यदि अच्छा है तो इन सभी के लिए भी अच्छा ही होगा, न कि इसका असर अकेले मुसलमानों पर पड़ेगा। हम धर्म की राजनीति नहीं करते। आपसे भी आग्रह है कि इसे धर्म और राजनीति के नजरिये से स्वार्थ के लिए न देखें।
कश्मीर स्वर्ग था और रहेगा
गृह मंत्री ने कहा कि 70 सालों से 370 का नुकसान जम्मू कश्मीर को झेलना पड़ा। अब पांच साल हमें दीजिए और विकास देखिए। सभी कहते हैं कि धरती पर कश्मीर ही स्वर्ग है लेकिन 370 की वजह से यहां न तो विकास हुआ और न पर्यटन का विस्तार हो सका। कश्मीर में 370 खत्म होने के पांच साल बाद जो विकास की धारा बहेगी, उससे साफ हो जाएगा कश्मीर स्वर्ग था और रहेगा। आतंकवाद भी खत्म होगा।
भ्रष्टाचार और स्वार्थ के लिए 370
महज तीन परिवारों ने भ्रष्टाचार के लिए 370 को 70 सालों तक बनाए रखा। आंकड़े गिनाते हुए कहा कि देश में अन्य राज्यों में केंद्र से प्रति व्यक्ति 8227 रुपये की तुलना में 27 हजार 358 रुपये जारी हुए लेकिन जमीन पर वहां कोई विकास नहीं दिखा। युवाओं को उकसाने वालों के बच्चे लंदन-अमेरिका में पढ़ते हैं और कश्मीर के युवा गुमराह हैं। 370 खत्म होने पर आज जो लोग हो-हल्ला मचा रहे हैं, दरअसल वह कश्मीर के लिए नहीं बल्कि अपने खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच शुरू होने पर हंगामा कर रहे हैं।
यह कदम असांविधानिक नहीं
गृह मंत्री ने कहा, जम्मू कश्मीर से 370 को हटाना असंवैधानिक नहीं है। हालांकि उन्होंने विपक्ष को चुनौती भी दी कि एनजीओ की ब्रिगेड वाले दल इसका विरोध जरूर करेंगे लेकिन विरोध कहीं ठहर नहीं पाएगा। अनुच्छेद 370 को पूरी तरह से संवैधानिक तौर पर खत्म किया जा रहा है। उन्होंने सवाल भी किया कि संविधान में ही यह अस्थायी व्यवस्था थी, फिर क्या कोई अस्थायी व्यवस्था 70 सालों तक रह सकती है।
काउंसलर तक नहीं बन पाए
शाह ने कहा देश के विभाजन के बाद पाक से आए शरणार्थी 370 की वजह से जम्मू कश्मीर में काउंसर तक नहीं बन पाए जबकि मनमोहन सिंह और इंद्र कुमार गुजराल दो-दो प्रधानमंत्री बने। नागरिकता नहीं मिलने का नुकसान 370 की वजह से ही झेलना पड़ा। इससे जम्मू कश्मीर, घाटी और लद्दाख को नुकसान हुआ। राष्ट्रपति शासन में वहां पंचायत चुनाव हुए और एक बूंद खून नहीं बहा।
35-40 हजार पंच-सरपंचों को लोकतांत्रिक अधिकार मिला। राजीव गांधी के समय पंचायती राज अधिकार सिर्फ जम्मू-कश्मीर में इसलिए लागू नहीं हो सका क्योंकि वहां 370 की वजह से देश का संविधान लागू नहीं होता। इंदिरा जी ने जनप्रतिनिधि की सदस्यता 6 साल की, तब जम्मू कश्मीर में इसे लागू कर दिया गया लेकिन जब मोरारजी देसाई ने इसे वापस 5 साल किया तो वह लागू नहीं हो सका। फायदे के लिए व्यवस्था की गई।
41849 लोग मारे गए
1989 से अब तक जम्मू कश्मीर के रक्तपात में 41849 लोगों की मौत हुई। यदि 370 नहीं होता तो इतनी जान नहीं जाती। 370 की वजह से वहां न तो लोग जमीन खरीद कर बस सकते और न ही होटल-पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता। विकास नहीं हुआ क्योंकि वहां कोई उद्योग नहीं लगा सकता। बेरोजगारी बढ़ी और अशिक्षा के चलते युवा गुमराह हुए। शिक्षा के अधिकार के तहत 6 से 14 साल आयु वर्ग के लिए पढ़ाई की अनिवार्यता 370 के चलते जम्मू कश्मीर में लागू नहीं हो पाई।
पाक पर भी इशारा
युवकों के गुमराह होने को लेकर शाह ने पाक पर भी निशाना साधा। बोले, पाक ने आतंकवाद को पनपाया। गुजरात और राजस्थान भी पाक सीमा से जुड़े राज्य थे, लेकिन वहां के युवक गुमराह नहीं हुए क्योंकि वहां 370 नहीं था। जम्मू कश्मीर में 370 के चलते ही युवा गुमराह हुए। उन्होंने सरदार पटेल और नेहरू की चर्चा करते हुए कहा कि सरदार पटेल ने पहल की तो हैदराबाद और जूनागढ़ भारत का हिस्सा रहा और नेहरू ने पहल की तो कश्मीर-पीओके हुआ।
उन्होंने दोहराया कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा, अब 370 खत्म होने से अभिन्न व अभिन्न हिस्सा रहेगा। उम्मीद जताई अब फिर से कश्मीर हंसता, खेलता, दौड़ता नजर आएगा। वहां बम धमाकों की जगह हंसी-खिलखिलाहट सुनाई पड़ेगी।