संसद ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से संबंधित याचिकाएं दायर की गई हैं। वहीं अब आर्टिकल 370 हटाने के समर्थन में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग हस्तक्षेप आवेदन दायर किए गए।
दो अगस्त से शुरू होनी है सुनवाई
कश्मीरी हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन, ‘यूथ 4 पनुन कश्मीर’ और समाजिक कार्यकर्ता विरिंदर कौल ने वकील सिद्धार्थ प्रवीण आचार्य के जरिये अपने-अपने आवेदन दाखिल किए। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ दो अगस्त से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
अनुच्छेद 370 और 35-ए के कारण अलगाववाद पैदा हुआ
‘यूथ 4 पनुन कश्मीर’ ने अपने आवेदन में कहा कि अनुच्छेद 370 और 35-ए ने संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन किया था। इसने कभी भी भारतीय संविधान की सर्वोच्चता को मान्यता नहीं दी। यह भारत की एकता और संप्रभुता पर हमला थे। इन दोनों की वजह से पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के शेष भारत के साथ मनोवैज्ञानिक एकीकरण की कमी रही। यह अलगाववादी विचारों का कारण बना जिससे निर्दोष कश्मीरी पंडितों का जातीय सफाया हुआ।
अनुच्छेद 370 भेदभावपूर्ण था
सामाजिक कार्यकर्ता विरिंदर कौल ने आवेदन में कहा कि अनुच्छेद 370 भेदभावपूर्ण था। इसने नागरिकों के दो वर्ग बनाए- एक पूर्ववर्ती राज्य जम्मू और कश्मीर के लिए और दूसरा शेष भारत के लिए। इसे निरस्त कर केंद्र सरकार ने उस भेदभाव को हटा दिया है।
आगे उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता के मुद्दे को इस तरह से हेरफेर करने के लिए तैयार किया गया था कि भारतीय करदाताओं के पैसे से एक आभासी ‘शेखडोम या सल्तनत’ या मिनी पाकिस्तान का पोषण किया जा सके। अनुच्छेद 370 को लागू रखने से अलगाव की भावना बनी रही और पूर्ववर्ती राज्य को विवादित क्षेत्र बताने वाले पाकिस्तानी दुष्प्रचार को बढ़ावा मिला।
शीर्ष अदालत ने 11 जुलाई को कही थी बड़ी बात
शीर्ष अदालत ने 11 जुलाई को कहा था कि वह अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 2 अगस्त से रोजाना सुनवाई शुरू करेगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न पक्षों को लिखित प्रस्तुतियां दाखिल करने की समय सीमा 27 जुलाई तय की थी।