वानी शुरूआत में एक आतंकवाद के रास्ते पर थे, लेकिन बाद में हिंसा की निरर्थकता महसूस करने के बाद वे सेना में शामिल हो गए थे। सामान्यतौर पर लोगों यही मानना है कि आतंक का अपना कोई ईमान नहीं होता, लेकिन शहीद लांस नायक नाजिर अहमद वानी उनमें से नहीं थे। उन्होंने आतंक की राह छोड़ खुद को देश सेवा के लिए समर्पित कर दिया था।
तीन बार सेना ने किया था सम्मानित
लांसनायक वानी एक बेहतरीन सिपाही थे और वर्ष 2007 में उनकी वीरता के लिए उन्हें सेना मेडल दिया गया था। जिसके बाद उन्हें दो बार अगस्त 2017 और 2018 में सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। वानी के घर में पत्नी और दो बच्चे हैं। उन्होंने करियर की शुरुआत वर्ष 2004 में टेरिटोरियल आर्मी से की थी। वानी का गांव आतंकी गतिविधियों के लिए कुख्यात है। लेकिन जैसे की वानी की मौत की खबर मिली थी पूरे गांव में मातम छा गया था।