आतंकवाद के वित्तपोषण के एक मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा 2017 में गिरफ्तार किए गए कश्मीरी व्यापारी जहूर वटाली को एक लाइलाज बीमारी के इलाज के लिए जेल से निकाल कर घर में नजरबंद कर दिया गया है। फरवरी की शुरुआत में ही विशेष एनआईए अदालत ने जहूर वटाली के नियमित जमानत के आवेदन को खारिज कर दिया था। हालांकि उनकी बीमारी को देखते हुए विशेष कोर्ट ने उन्हें घर से न्यायिक हिरासत में इलाज चालू रखने की अमुमति दी है।
विशेष एनआईए अदालत ने वटाली की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इसे सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है. एक निजी अस्पताल के साथ-साथ एम्स के डॉक्टरों की सलाह को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक वटाली को घर ले जाया जा सकता है। यहां से उन्हें अपने इलाज के लिए अस्पताल या परीक्षण के लिए डायग्नोस्टिक सेंटर जाने की अनुमति दी जाएगी।विशेष एनआईए अदालत ने कहा कि आरोपी की नजरबंदी की अवधि के दौरान उसके परिवार के सदस्यों और वकील को छोड़कर किसी को भी आरोपी से मिलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
न्यायधीश ने कहा कि आरोपी वृद्ध है और उसकी स्वास्थ्य की स्थिति नाजुक है और उसे तुरंत इलाज की जरूरत है और साथ ही उसकी दैनिक गतिविधियों के लिए सहायता भी दी जानी चाहिए, जिसके लिए उसे जेल से बाहर रहने की जरूरत है, लेकिन अपराध की गंभीरता मुझे उसे नियमित जमानत देने से रोकती है। इस पर आरोपी जहूर वटाली के वकील ने दलील देते हुए कहा कि नजरबंदी में रहने पर वटाली के पोते उसके बारे में प्रतिकूल राय बनाएंगे क्योंकि उन्हें पता नहीं था कि वह हिरासत में है। आरोपी की ओर से व्यक्त की गई चिंता को समझते हुए न्यायाधीश ने कहा बच्चों को सच्चाई से सामना करना होगा।
गौरतलब है कि एनआईए ने अगस्त 2017 में वटाली को जम्मू-कश्मीर टेरर फाइनेंसिंग मामले से कथित तौर पर जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।