पुलवामा आतंकी हमले के एक महीने बाद करतारपुर साहिब कॉरिडोर पर भारत-पाकिस्तान के बीच वीरवार को अधिकारी स्तर की बैठक हुई। दोनों देशों इस बात पर सहमत हुए कि श्रद्धालुओं की एंट्री के लिए पासपोर्ट अनिवार्य होगा। भारतीय अधिकारियों ने प्रतिदिन पांच हजार श्रद्धालुओं को करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए भेजे जाने पर जोर दिया। इसके अलावा यह प्रस्ताव भी दिया कि गुरु पर्वों और अन्य ऐतिहासिक दिवसों पर अलग से दस हजार श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति और इस कॉरिडोर को पूरा साल खुला रखा जाए।
बैठक में यह भी बात हुई कि भारत सरकार करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए जाने वाले जत्थे में शामिल श्रद्धालुओं की सूची पाकिस्तान को देगी। पाकिस्तान सरकार एक-दो दिन में उस पर अपनी अनुमति दे देगी। कोशिश रहेगी कि करतारपुर साहिब की यात्रा केवल पासपोर्ट से हो जाए। वीजा और अन्य दस्तावेजों आदि की जरूरत न पड़े। इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है।
2 अप्रैल को फिर होगी बैठक :
अब 19 मार्च को दोनों देशों के तकनीक विशेषज्ञ डेरा बाबा नानक इंटरनेशनल बॉर्डर की जीरो रेखा पर करतारपुर साहिब के लिए बनाए जा रहे टर्मिनलों और अन्य निर्माण कार्यों की जांच करेंगे। दोनों कॉरिडोर एक-दूसरे कैसे मिलेंगे, इस पर भी चर्चा होगी। दो अप्रैल को एक बार फिर दोनों देशों के अधिकारी पाकिस्तान वाघा बॉर्डर पर एक बैठक करेंगे। इस बैठक में केवल पासपोर्ट के साथ यात्रा की अनुमति देने पर बातचीत होगी।