बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आलोक कुमार व अन्य दो अधिकारियों के खिलाफ सबूतों के अभाव में पेश की गई क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। तीनों पर कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप था। इस मामले में कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस द्वारा अदालत में क्लोजर रिपोर्ट लगाई गई थी।
विशेष अदालत ने अपने आदेश में क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि अदालत शिकायत की जांच दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 200 के तहत करेगी। यह धारा अदालत को शिकायत का संज्ञान लेने और स्वयं परीक्षा शुरू करने की अनुमति देता है।
2014 का है मामला
एक व्यक्ति मल्लिकार्जुन एमबी ने इस मामले में 2014 में शिकायत दर्ज कराई थी। कहा गया था कि वह 2014 में ऑरेंज बार एंड रेस्तरां में हुई लड़ाई में शामिल थे। उस समय, व्यलीकावल पुलिस स्टेशन में तैनात कांस्टेबल चंद्रशेखर ने इस मामले को रफा-दफा करने के लिए पांच लाख रुपये की रिश्वत ली थी। इसके बाद तत्कालीन एसीपी दानेश्वर राव और व्यालिकवाल पुलिस इंस्पेक्टर शंकरचारी पर चंद्रशेखर के माध्यम से 5 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। घटना के अगले दिन उन्होंने कथित तौर पर तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार के नाम पर मल्लिकार्जुन से 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी। उन्होंने कथित तौर पर मल्लिकार्जुन को 48 घंटे के भीतर भुगतान नहीं करने पर गंभीर आपराधिक आरोपों के तहत मामला दर्ज करने की धमकी दी थी।
मार्च में लगाई गई थी क्लोजर रिपोर्ट
इस मामले में लोकायुक्त पुलिस ने जांच पूरी करके सात साल बाद 19 मार्च, 2022 को मामले में कोई सबूत नहीं होने की बात कहते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। इसके बाद शिकायत करना मल्लिकार्जुन ने इसी साल मार्च में क्लोजर रिपोर्ट को लेकर विरोध ज्ञापन दाखिल किया था।