चुनाव से पहले जद (एस) से गठबंधन के लिए बड़ा दिल करने की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सलाह को भाव न देने वाली कांग्रेस को इसका राजनीतिक मतलब रुझान आने के बाद समझ में आया। कांग्रेस जद (एस) के साथ सीटें साझा करने को तैयार नहीं थी लेकिन मंगलवार को उसे बिना शर्त समर्थन देने का एलान कर दिया।
कांग्रेस मान बैठी थी नहीं पड़ेगी जद (एस) की जरूरत
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी चुनावी भाषणों में जद (एस) को भाजपा की बी टीम बताया और निशाने पर रखा। दरअसल, कांग्रेस शुरू से ही मान बैठी थी कि 2013 की तरह उसे जद (एस) की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अति आत्मविश्वास से लबरेज कांग्रेस बहुमत के लिए जरूरी संख्या पूरी न होने पर प्लान बी में भी उसे साथ लेकर नहीं चलना चाहती थी। संख्या पूरी करने के लिए उसे विद्रोहियों और निर्दलीयों पर भरोसा था।