सिद्धरमैया ने कहा, 'हमने कल इस बारे में चर्चा की थी कि नए विधेयक पेश नहीं किए जाएंगे। हम इस बात को लेकर सहमत हुए थे कि केवल अध्यादेश पारित किए जाएंगे। अब, उन्होंने (प्रभु चव्हाण) अचानक यह गो हत्या रोधी विधेयक पेश कर दिया।'
हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े केगेरी ने कहा कि उन्होंने बैठक में यह साफ तौर पर कहा था कि महत्वपूर्ण विधेयक बुधवार और बृहस्पतिवार को पेश किए जाएंगे। इस जवाब से संतुष्ट नहीं होने के बाद कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
बता दें कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने पिछले दिनों गोवध पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि निकट भविष्य में कर्नाटक में गोवध पर प्रतिबंध एक वास्तविकता होगा। कर्नाटक के पूर्व मंत्री एवं महाराष्ट्र, गोवा और तमिलनाडु में पार्टी मामलों के प्रभारी सीटी रवि ने कहा था कि गोवध पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून आगामी विधानसभा सत्र में पारित किया जाएगा।
चिक्कमंगलुरु से विधायक ने ट्वीट कर यह बात कही थी। उन्होंने ट्वीट में लिखा था कि मैंने पशुपालन मंत्री श्री प्रभु चव्हाण से कहा है कि कर्नाटक पशु वध संरक्षण और मवेशी संरक्षण विधेयक कैबिनेट में पारित हो और आगामी विधानसभा सत्र में भी पेश किया जाए।
रवि ने इस महीने की शुरुआत में यह भी कहा था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश की तर्ज पर कर्नाटक विवाह के लिए धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून बनाएगा। उन्होंने कहा था कि जब जिहादी हमारी बहनों की गरिमा छीनेंगे, तो हम चुप नहीं रहेंगे।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 31 अक्तूबर के अपने आदेश में कहा था कि केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन वैध नहीं है। अदालत ने यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश में एक नवविवाहित जोड़े की याचिका खारिज करते हुए की थी जिसने पुलिस और महिला के पिता को यह निर्देश देने का अनुरोध किया था कि वे उनके वैवाहिक जीवन में दखल नहीं दें। याचिका में कहा गया था कि दोनों ने इस साल जुलाई में शादी कर ली थी, लेकिन महिला के परिवार के सदस्य उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप कर रहे थे।