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कर्नाटक: हंगामे के बीच गोवध रोधी विधेयक पारित, कांग्रेस ने कल बुलाई विधायक दल की बैठक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 09 Dec 2020 07:44 PM IST
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प्रतिकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को गोवंश वध रोकथाम और मवेशी संरक्षण विधेयक 2020 को पारित कर दिया गया है। कर्नाटक के मंत्री केजी मधुस्वामी ने इसे लेकर कहा कि गाय और बछड़ों को मारने की अनुमति नहीं है, 13 वर्ष से अधिक आयु वाली भैंसों को मारने की अनुमति दी गई है। अवैध बिक्री, परिवहन और गोहत्या को दंडनीय बनाया गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर कोई गाय किसी बीमारी से पीड़ित हो जाती है और वह बीमारी दूसरे मवेशियों में फैल सकती है तो उस गाय को मारा जा सकता है। उधर, कांग्रेस ने इसके विरोध में सदन से वॉकआउट किया। वहीं ताजा जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक के पूर्व सीएम और नेता प्रतिपक्ष सिद्धारमैया ने इस संबंध में गुरुवार को कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक बुलाई है।





Karnataka Prevention of Slaughter and Preservation of Cattle Bill-2020 was passed in the State Assembly today.— ANI (@ANI) December 9, 2020



हंगामे के बीच पेश हुआ विधेयक
इससे पहले कर्नाटक सरकार ने बुधवार को राज्य की विधानसभा में हंगामे के बीच गो हत्या रोधी विधेयक पेश किया। भाजपा सूत्रों ने कहा कि 'कर्नाटक मवेशी वध रोकथाम एवं संरक्षण विधेयक-2020' के तहत राज्य में गो हत्या पर पूर्ण रोक का प्रावधान है। साथ ही गाय की तस्करी, अवैध ढुलाई, अत्याचार एवं गो हत्या में लिप्त पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान है।

पशुपालन मंत्री प्रभु चव्हाण ने जैसे ही विधेयक पेश किया, विपक्ष के नेता सिद्धरमैया के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायक अध्यक्ष के आसन के सामने आ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक को पेश करने के संबंध में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में चर्चा नहीं की गई।
 

 
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इस वजह से हुआ हंगामा

सिद्धरमैया ने कहा, 'हमने कल इस बारे में चर्चा की थी कि नए विधेयक पेश नहीं किए जाएंगे। हम इस बात को लेकर सहमत हुए थे कि केवल अध्यादेश पारित किए जाएंगे। अब, उन्होंने (प्रभु चव्हाण) अचानक यह गो हत्या रोधी विधेयक पेश कर दिया।'

हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े केगेरी ने कहा कि उन्होंने बैठक में यह साफ तौर पर कहा था कि महत्वपूर्ण विधेयक बुधवार और बृहस्पतिवार को पेश किए जाएंगे। इस जवाब से संतुष्ट नहीं होने के बाद कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
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विधेयक के प्रमुख बिंदु

  • गाय और बछड़ों के साथ 13 साल से कम आयु वाली भैंसों के संरक्षण का भी प्रावधान
  • आरोपी लोगों के खिलाफ तेज ट्रायल के लिए विशेष अदालत गठित करने का प्रावधान
  • मवेशियों की सुरक्षा के लिए गोशाला या पशु-शालाओं को खोलने का भी प्रावधान
  • गायों और बछड़ों के संरक्षण के लिए पुलिस को जांच करने का अधिकार दिया गया

भाजपा नेता ने की थी वकालत

बता दें कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने पिछले दिनों गोवध पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि निकट भविष्य में कर्नाटक में गोवध पर प्रतिबंध एक वास्तविकता होगा। कर्नाटक के पूर्व मंत्री एवं महाराष्ट्र, गोवा और तमिलनाडु में पार्टी मामलों के प्रभारी सीटी रवि ने कहा था कि गोवध पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून आगामी विधानसभा सत्र में पारित किया जाएगा। 

चिक्कमंगलुरु से विधायक ने ट्वीट कर यह बात कही थी। उन्होंने ट्वीट में लिखा था कि मैंने पशुपालन मंत्री श्री प्रभु चव्हाण से कहा है कि कर्नाटक पशु वध संरक्षण और मवेशी संरक्षण विधेयक कैबिनेट में पारित हो और आगामी विधानसभा सत्र में भी पेश किया जाए।

धर्मांतरण पर प्रतिबंध के लिए कानून बनाने के भी पक्षधर

रवि ने इस महीने की शुरुआत में यह भी कहा था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश की तर्ज पर कर्नाटक विवाह के लिए धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून बनाएगा। उन्होंने कहा था कि जब जिहादी हमारी बहनों की गरिमा छीनेंगे, तो हम चुप नहीं रहेंगे। 

बता दें कि उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 31 अक्तूबर के अपने आदेश में कहा था कि केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन वैध नहीं है। अदालत ने यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश में एक नवविवाहित जोड़े की याचिका खारिज करते हुए की थी जिसने पुलिस और महिला के पिता को यह निर्देश देने का अनुरोध किया था कि वे उनके वैवाहिक जीवन में दखल नहीं दें। याचिका में कहा गया था कि दोनों ने इस साल जुलाई में शादी कर ली थी, लेकिन महिला के परिवार के सदस्य उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप कर रहे थे।
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