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Karnataka: 'अब क्या फायदा...', अमेरिकी दौरे के लिए अनुमति को लेकर प्रियांक खरगे ने विदेश मंत्रालय से पूछा सवाल

Sat, 21 Jun 2025 07:59 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।

सार

Karnataka: कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने अमेरिका यात्रा के लिए अनुमति में देरी को लेकर विदेश मंत्रालय पर निशाना साधा। खरगे ने इसे देर से लिया गया यू-टर्न बताया। उन्होंने पूछा कि जब सारे कार्यक्रम खत्म हो गए हैं, तब अनुमति देने का क्या मतलब है? 
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प्रियांक खरगे। - फोटो : एक्स/प्रियांक खरगे
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विस्तार
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कर्नाटक के इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और ग्रामीण विकास मंत्री प्रियांक खरगे ने शनिवार को विदेश मंत्रालय (एमईए) की उस प्रक्रिया की आलोचना की, जिसमें पहले उन्हें बिना किसी कारण के अमेरिका दौरे की अनुमति नहीं दी गई और बाद में अचानक अनुमति दे दी गई। उन्होंने इसे देर से लिया गया यू-टर्न बताया। 

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खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूछा कि जब प्रमुख कार्यक्रम या तो पूरे हो चुके हैं या खत्म होने वाले हैं, तो अब अनुमति देने का क्या मतलब है? मंत्री ने बताया कि उन्होंने 15 मई को 14 से 27 जून के बीच अमेरिका जाने की अनुमति मांगी थी, ताकि कर्नाटक सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए दो वैश्विक मंचों में हिस्सा ले सकें और 25 से अधिक बड़ी कंपनियों, विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ बैठकों में निवेश की संभावनाएं तलाश सकें। 

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मंत्री प्रियांक खरगे और अधिकारियों के दौरे के लिए 15 मई को आवेदन किया गया, 4 जून को इसे खारिज कर दिया गया। 6 जून को केवल अधिकारियों के दौरे के लिए आवेदन किया, 11 जून को मंजूरी मिल गई। 12 जून को केवल केओनिक्स के अध्यक्ष के लिए आवेदन किया गया, 14 जून को मंजूरी मिली।

उन्होंने दावा किया कि उनके आवेदन क बिना किसी कारण बताए खारिज किया गया। खरगे ने कहा कि उन्होंने 19 जून को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्हें पूरे घटनाक्रम के बारे में विस्तार से बताया। किस आधार पर आवेदन को खारिज किया गया, इस पर भी सवाल उठाए और संभावित दखल के बारे में चिंता जताई, जिसे मीडिया में भी व्यापक रूप से रिपोर्ट किया गया। 

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उन्होंने कहा, उसी दिन शाम तक विदेश मंत्रालय ने 19 जून की तारीख वाला अपना अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया। खरगे ने कहा, मेरे मूल आवेदन के 36 दिन बाद, आधिकारिक इनकार के 15 दिन बाद और मेरी निर्धारित यात्रा से 5 दिन पहले, उन्होंने अपना पिछला फैसला वापस लिया। 

मंत्री ने कहा कि इसकी टाइमिंग पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने पूछा, पहले अनुमति क्यों नहीं दी गई? क्या मामला सार्वजनिक होने के बाद जवाबदेही से बचने के लिए पिछला आदेश वापस लिया गया? महत्वपूर्ण घटनाओं के खत्म होने या पूरी होने के करीब पहुंचने के बाद मंजूरी देने का क्या फायदा? क्या विदेश मंत्रालय अब अपने पहले मंजूरी न देने के फैसले की व्याख्या करने से बचने के लिए देरी से मिली अनुमति का कारण बताएगा? 

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