कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने आरएसएस पर पैसों के लेनदेन में हेरा-फेरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने संगठन की आय के स्रोत, पंजीकरण की स्थिति और कर भुगतान को लेकर पारदर्शिता की मांग की। खरगे का कहना है कि सभी संस्थाओं को कानून और संविधान के दायरे में रहकर जवाबदेह होना चाहिए।
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संगठन मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त है। उन्होंने आरएसएस की आय के स्रोत, उसके पंजीकरण की स्थिति और कर भुगतान को लेकर भी सवाल खड़े किए।
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एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि देश में लागू कानून और संविधान सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होने चाहिए और आरएसएस को भी इसके दायरे में आना चाहिए। उन्होंने कहा, 'देश में जो कानून और संविधान सभी के लिए हैं, वही आरएसएस पर भी लागू होने चाहिए।'
52 वर्षों तक नहीं फहराया राष्ट्रीय ध्वज : प्रियांक खरगे
खरगे ने आरोप लगाया कि आरएसएस ने अपने कार्यालय में 52 वर्षों तक राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया और अब वह दूसरों को देशभक्ति का पाठ पढ़ाता है। उन्होंने कहा कि आरएसएस का 2,500 से अधिक संगठनों का नेटवर्क है, जो अमेरिका और इंग्लैंड सहित विभिन्न देशों से जुड़ा हुआ है। उनका दावा था कि इन संगठनों से धन लिया जाता है और यह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है।
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प्रियांक खरगे ने आरएसएस पर दागे कौन से सवाल?
पत्रकारों से बातचीत में खरगे ने कहा कि आरएसएस एक अपंजीकृत संगठन है। उन्होंने सवाल किया कि क्या वे कानून और संविधान से ऊपर हैं? उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि अन्य संस्थाएं, जैसे क्लब आदि, पंजीकृत होकर कर का भुगतान करती हैं, तो आरएसएस क्यों नहीं।
उन्होंने 'गुरु दक्षिणा' के जरिए मिलने वाले पैसों पर भी सवाल उठाया और पूछा कि यह राशि कहां से आती है और उस पर टैक्स क्यों नहीं दिया जाता। खरगे ने कहा कि जब आम नागरिकों और अन्य संगठनों की हर आय का हिसाब रखा जाता है, तो आरएसएस के पैसों पर जवाबदेही क्यों नहीं तय की जाती। मंत्री ने कहा कि सभी संगठनों को कानून और संविधान के दायरे में लाना आवश्यक है, चाहे वह आरएसएस हो या कोई अन्य संस्था।