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कर्नाटक: आईपीएस अधिकारी बनकर करता था ठगी, फेक फेसबुक आईडी से लोगों को बनाया शिकार, राजस्थान से आरोपी गिरफ्तार

Wed, 02 Sep 2026 05:21 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, बंगलूरू

सार

राजस्थान के एक नाबालिग ने आईपीएस अधिकारी नारायण एम. के नाम से फेकफेसबुक अकाउंट बनाकर लोगों से पैसे ठगे। पुलिस ने उसे पकड़ा और 2 लाख रुपये नकद बरामद किए। पूछताछ में देशभर के आईपीएस- आईएएस अधिकारियों की फर्जी आईडी बनाकर ठगी करने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच जारी है।
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साइबर अपराध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पुलिस ने बुधवार को राजस्थान के एक नाबालिग को एक आईपीएस अधिकारी के नाम से फेक फेसबुक  अकाउंट बनाने और अलग-अलग बहाने से लोगों से पैसे वसूलने के आरोप में पकड़ा गया है।

पुलिस ने क्या बताया? 

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उन्होंने बताया कि आरोपी ने आईपीएस अधिकारी नारायण एम. के नाम से एक फेक अकाउंट बनाया था, जो अभी बंगलूरू में डिप्टी कमिश्नर ऑफ़पुलिस (इलेक्ट्रॉनिक सिटी डिवीजन) के पद पर तैनात हैं।पुलिस ने नाबालिग के पास से 2 लाख रुपये नकद बरामद किए, जो कथित तौर पर फेक बैंक अकाउंट के जरिए धोखाधड़ी से हासिल किए गए पैसे का हिस्सा थे। इसके साथ ही इस मामले में  हेब्बागोडी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया।

जांच में क्या पता चला? 
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने फेक अकाउंट का इस्तेमाल करके अधिकारी के जानने वालों और आम लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा और फिर अलग-अलग बहाने से उनसे पैसे वसूले। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने कई पहलुओं से पूछताछ की और राजस्थान के कोटा खुर्द गांव से चल रहे एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया।

उन्होंने बताया कि 24 अगस्त को पुलिस ने उस नाबालिग के माता-पिता को नोटिस जारी किया, जो कथित तौर पर इस अपराध में शामिल था।  पूछताछ के लिए उसे हिरासत में ले लिया।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने क्या बताया? 

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अधिकारी ने कहा, 'पूछताछ के दौरान उसने बताया कि उसने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर यह अपराध किया था। उसने खुलासा किया कि उन्होंने देश भर में कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नाम से फेक फेसबुक अकाउंट बनाए थे। उनकी पहचान का नाटक करके पैसे वसूल रहे थे।' 

कैसे लोगो के साथ करते थे धोखाधड़ी? 
उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि धोखेबाज फेक अकाउंट का इस्तेमाल करके यह दावा करते थे कि उनका एक दोस्त सीआरपीएफ कमांडेंट है, जिसका ट्रांसफर हो गया है और इसलिए वह कम कीमत पर फर्नीचर और घर का सामान बेच रहा है। उन्होंने आगे कहा, 'लोगों को इन दावों पर यकीन दिलाकर और सामान के लिए पैसे लेकर उन्होंने पैसे वसूले और उनके साथ धोखाधड़ी की।'

पुलिस ने बताया कि इस मामले में कई और लोगों के शामिल होने का शक है और उन्हें खोजने की कोशिशें जारी हैं, साथ ही आगे की जांच भी चल रही है। 25 अगस्त को नाबालिग को देवनहल्ली के एक रिहैबिलिटेशन सेंटर भेज दिया गया।

पुलिस ने क्या सलाह दी है? 

पुलिस ने लोगों को सलाह दी कि वे उन साइबर धोखेबाजों से सावधान रहें जो आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नाम से फेक सोशल मीडिया अकाउंट बनाते हैं। फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं और फिर पैसे मांगते हैं। जिन लोगों को किसी व्यक्ति या अधिकारी के नाम पर बने फेक अकाउंट से पैसे की मांग वाले मैसेज मिलते हैं। उन्हें सलाह दी जाती है कि वे तुरंत संबंधित पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं और पूरी सावधानी बरतें।

 

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