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Maharastra Karnataka Border Dispute: उपमुंख्यमंत्री फडवीस ने कहा- सीमा विवाद पर प्रस्ताव किया जाएगा पारित

Sun, 18 Dec 2022 03:12 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

नसीपी नेता अजीत पवार ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को सीमा विवाद पर बातचीत सार्वजनिक करनी चाहिए थी।
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Maharashtra Deputy CM Devendra Fadnavis and cm eknath shinde - फोटो : ANI
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विस्तार
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कर्नाटक और महाराष्ट्र सीमा विवाद को लेकर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सीएम एकनाथ शिंदे शीतकालीन सत्र में एक प्रस्ताव पारित करेंगे। उधर एनसीपी नेता अजीत पवार ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को सीमा विवाद पर दोनों राज्यों के सीएम के साथ की गई बैठक को सावर्जनिक करना चाहिए। अगर राज्य सरकार सीमा विवाद पर प्रस्ताव लाती है तो उसका समर्थन किया जाएगा। 

महाराष्ट्र की स्थापना के बाद से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला

महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच बेलगावी व कारवार के कुछ गांवों को लेकर सीमा विवाद है। कर्नाटक में आने वाले इन गांवों की आबादी मराठी भाषी है। महाराष्ट्र में लंबे समय से इन गांवों को राज्य में शामिल किए जाने की मांग की जा रही है। 1960 में महाराष्ट्र की स्थापना के बाद से यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

 

गृह मंत्री ने की थी बैठक 

महाराष्ट्र और कर्नाटक सीमा विवाद पर गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की थी। बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने हिस्सा लिया था। इस बैठक में हुई बातचीत को सार्वजनिक करने की बात अजीत पवार ने की हैं। 

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जानें क्या है दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद
बेलगावी सीमा विवाद कर्नाटक और महाराष्ट्र के भारतीय राज्यों के बीच एक विवाद है।  वर्तमान में बेलगावी कर्नाटक का एक जिला है, लेकिन ब्रिटिश भारत में, वर्तमान गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों के साथ, बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा था। 1881 की जनगणना में बेलागवी जिले में 864,014 निवासियों की आबादी दर्ज की गई थी। उनमें से 556,397 (64.39 प्रतिशत) कन्नड़ भाषी थे और 225,008 (26.04 प्रतिशत) मराठी बोलते थे। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के साथ, पूर्व बॉम्बे प्रेसीडेंसी का बेलागवी जिला बॉम्बे राज्य का हिस्सा बन गया। 1956 में, राज्य पुनर्गठन अधिनियम ने बेलगावी जिले को नवगठित मैसूर राज्य ( अब कर्नाटक) में शामिल कर लिया। इसने बेलागवी को अपने बहुसंख्यक मराठी भाषियों के साथ कन्नड़-बहुसंख्यक कर्नाटक के भीतर रखा। इसके बाद से ही दोनों राज्यों में मतभेद शुरू हो गया।

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