कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया और उनकी पत्नी से जुड़े मुडा घोटाला मामले ने राज्यभर की राजनीति गर्म कर दी है। जहां एक तरफ सीएम को क्लीन चीट देने को लेकर भाजपा लगातार हमलावर हो रही है तो दूसरी ओर लोकायुक्त पुलिस ने विशेष अदालत में आज रिपोर्ट सौंप दिया है।
कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया और उनकी पत्नी से जुड़े मुडा मामले में लोकायुक्त पुलिस ने शनिवार को बंगलूरू की विशेष अदालत को रिपोर्ट सौंप दी है। ये रिपोर्ट 27 जनवरी को होने वाली अदालत की सुनवाई से पहले प्रस्तुत किया गया है। बता दें कि रिपोर्ट को पहले 26 जनवरी को पेश किया जाना था, लेकिन 25 जनवरी को शनिवार और अदालत की छुट्टी होने के कारण लोकायुक्त पुलिस ने रिपोर्ट 24 जनवरी को ही प्रस्तुत कर दी।
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भाजपा ने उठाए थे सवाल
साथ ही भाजपा ने शुक्रवार को मीडिया में आई उन खबरों के मद्देनजर मुडा घोटाले में लोकायुक्त जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, जिनमें कहा गया है कि लोकपाल की पुलिस शाखा ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को क्लीन चिट दे दी है। सीएम सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती बीएम और उनके पत्नी के भाई मल्लिकार्जुन स्वामी यहां एक विशेष अदालत के निर्देश पर लोकायुक्त पुलिस की तरफ से दर्ज मामले में आरोपी हैं।
एक नजर पूरे मामले पर
मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। सरकार की तरफ से योजना को बंद करने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। सारा विवाद इसी से जुड़ा है।
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मामले में आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री की पत्नी की तीन एकड़ और 16 गुंटा भूमि मुडा की तरफ से अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। मैसूर के बाहरी इलाके में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी। आरोप है कि मुडा ने इस जमीन का अधिग्रहण किए बिना ही देवनूर तृतीय चरण की योजना विकसित कर दी।
कोर्ट ने स्वीकारी क्लोजर रिपोर्ट
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ 1.3 करोड़ रुपये की रिश्वत का मामला खारिज हो गया है। निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत ने सिद्धरमैया से जुड़े मामले में कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस की दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है।
बता दें कि मामला भाजपा के एक नेता की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित था। भाजपा नेता ने सिद्धरमैया पर मुख्यमंत्री के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान बंगलूरू टर्फ क्लब (बीटीसी) में एक प्रबंधक की नियुक्ति के बदले 1.3 करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया था। 18 जनवरी को अपने फैसले में अदालत ने कहा कि कर्नाटक लोकायुक्त, बंगलूरू के पुलिस उपाधीक्षक की ओर से 12 सितंबर 2024 को दायर की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया जाता है।