कर्नाटक के शिमोगा सीट पर लोकसभा उपचुनाव होने वाला है जिसे अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव का सेमी फाइनल माना जा रहा है। सिर्फ एक सीट पर 3 नवंबर को होने वाले लोकसभा उपचुनाव से जनता का रुख समझने में आसानी होगी। लेकिन इस उपचुनाव का मुख्य आकर्षण इस बार के हाई प्रोफाइल प्रत्याशी भी हैं।
कर्नाटक के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे प्रत्याशी के तौर पर शिमोगा सीट से किस्मत आजमायेंगे। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के सुपुत्र बी वाई राघवेंद्र(45) इस उपचुनाव में भाजपा की ओर से चुनावी मैदान में हैं। वहीं, मधु बंगारप्पा जो पूर्व सीएम एस बंगारप्पा के बेटे हैं वो भी शिमोगा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व सीएम एस बंगारप्पा कांग्रेस का दामन छोड़ जेडी(एस) में शामिल हो गये थे। बंगारप्पा के बेटे को कांग्रेस- जेडी(एस) के गठबंधन की ओर से चुनाव में उतारा गया है।
तीसरे अहम दावेदार के तौर पर 58 साल के महिमा पटेल का नाम सामने आ रहा है जो कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रहे जे एच पटेल के सुपुत्र हैं। जनता दल के पटेल के बेटे महिमा पटेल इस बार जनता दल (यूनाइटेड) की तरफ से चुनाव लड़ रहे हैं। ये तीनों प्रत्याशी राजनीति में लगातार सक्रिय रहे हैं और कई सरकारी पदों पर कार्यरत भी रहे हैं। लेकिन अब भी ये तीनों दावेदार राजनीति की बिसात अपना सिक्का जमाने के लिए अपने-अपने पिता पर निर्भर हैं।
दरअसल शिमोगा सीट कर्नाटक भाजपा के प्रमुख येदियुरप्पा की थी जो उनके त्यागपत्र देने के बाद खाली हुई है। यदुरप्पा ने इसी साल मई में राज्य विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी जिसके बाद वो सांसद पद छोड़ चुके हैं। इस लोकसभा सीट पर येदियुरप्पा के बेटे और पूर्व सासंद राघवेंद्र और बंगरप्पा के बेटे और पूर्व विधायक मधु बंगरप्पा के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही है। वहीं महिमा पटेल की दावेदारी को मजबूत नहीं माना जा रहा।
2009 में इस सीट पर कांग्रेस की ओर से बंगरप्पा और येदियुरप्पा के बेटे और भाजपा प्रत्याशी राघवेंद्र के बीच कड़ी टक्कर थी जिसमें बंगरप्पा महज 52,000 वोटों से राघवेंद्र से हार गये थे। वहीं, 2014 में बंगरप्पा के निधन के बाद मोदी लहर में येदियुरप्पा को शिमोगा सीट से बड़ी जीत हासिल हुई थी । इस सीट पर लिंगायत समुदाय का दबदबा है इसलिए येदियुरप्पा परिवार के लिए ये जिताउ सीट मानी जाती है।
लेकिन महिमा पटेल खेल कुछ बिगाड़ भी सकते हैं क्योंकि लिंगायत वोट उनकी तरफ भी जा सकता है जिससे भाजपा को नुकसान हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस जीत पर बी एस येदियुरप्पा का राजनैतिक भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा । अगर बेटे को जीत मिलती है तो येदियुरप्पा उपचुनाव के बाद कर्नाटक के सीएम बन सकते हैं। लेकिन ये इतना आसान नहीं होगा क्योंकि पार्टी के अंदर ही उनके खिलाफ कई आवाज उठती रहती है।
अगर शिमोगा लोकसभा उपचुनाव में भाजपा चूक जाती है तो अगले साल लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए 2014 की तरह विजय हासिल करना एक कठिन राह मानी जाएगी। वहीं कांग्रेस जेडीएस गठबंधन को कर्नाटक की जनता अपनाती है या नकारती है, वो तस्वीर भी ये उपचुनाव साफ कर देगा।