कर्नाटक विधान परिषद में राज्यपाल के कथित अपमान को लेकर भारी हंगामा हुआ। भाजपा ने कांग्रेस एमएलसी बी.के. हरिप्रसाद पर राज्यपाल के अपमान का आरोप लगाते हुए निलंबन की मांग की। कांग्रेस ने पलटवार किया। सभापति ने मामला एथिक्स कमेटी को भेजा। आइए इस विवाद को पूरी तरह से समझते हैं।
कर्नाटक की राजनीति शुक्रवार को उस वक्त गरमा गई, जब राज्यपाल के कथित अपमान के आरोपों को लेकर कर्नाटक विधान परिषद में जोरदार हंगामा हुआ। थावरचंद गहलोत से जुड़े विवाद पर विपक्षी भाजपा और सत्तारूढ़ कांग्रेस आमने-सामने आ गए। भारी शोर-शराबे के बीच सदन की कार्यवाही चार बार स्थगित करनी पड़ी और अब अगली बैठक 27 जनवरी को होगी।
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विवाद की जड़ कांग्रेस एमएलसी बीके हरिप्रसाद पर लगे आरोप हैं। भाजपा का कहना है कि हरिप्रसाद ने राज्यपाल का अपमान किया, जबकि कांग्रेस का तर्क है कि राज्यपाल ने राष्ट्रगान बजने से पहले सदन से बाहर निकलकर राष्ट्रगान का अपमान किया। दोनों पक्षों के दावों के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।
भाजपा का आरोप, निलंबन की मांग
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा एमएलसी ने हरिप्रसाद को सदन से निलंबित करने की मांग की। भाजपा सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि राज्यपाल का अपमान संविधान का अपमान है। नेता प्रतिपक्ष चलवाड़ी नारायणस्वामी ने कहा कि हरिप्रसाद का व्यवहार अस्वीकार्य है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस का पलटवार और हरिप्रसाद की सफाई
कांग्रेस एमएलसी और मंत्री हरिप्रसाद के समर्थन में खड़े नजर आए। कांग्रेस सदस्यों ने भाजपा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाए। हरिप्रसाद ने कहा कि नियमों के अनुसार राज्यपाल को राष्ट्रगान पूरा होने तक रुकना चाहिए था, लेकिन वे बिना रुके चले गए। उन्होंने इसे राष्ट्रगान का अपमान बताया और अपने आचरण को सही ठहराया।
एथिक्स कमेटी को भेजा गया मामला
लगातार हंगामे के बाद परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी ने हरिप्रसाद के आचरण को एथिक्स कमेटी के पास भेजने का आदेश दिया। साथ ही उन्होंने हरिप्रसाद की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें राज्यपाल द्वारा कथित राष्ट्रगान अपमान पर चर्चा की मांग की गई थी। सभापति ने सदस्यों को संयम बरतने की सलाह दी, लेकिन गतिरोध बना रहा।