बसवराज एस होरत्ती ने स्पष्ट किया कि सभापति के रूप में उनके पास संसदीय प्रक्रिया को नियंत्रित करने और सदस्यों को अनुशासन में रखने की शक्ति है। इसलिए, वह इस मामले में कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं चाहते हैं।
कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज एस होरत्ती ने सुवर्ण विधान सौध बेलगावी की परिषद में एक घटना को लेकर भाजपा एमएलसी सीटी रवि द्वारा लक्ष्मी हेब्बालकर के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल की सीआईडी जांच पर अपनी आपत्ति जताई है। यह घटना पिछले साल 19 दिसंबर को हुई थी।
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उन्होंने 10 जनवरी को राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर को पत्र लिखा, जिसमें बताया कि उन्होंने इस मामले में पहले ही अपना फैसला दे दिया है, जो अंतिम है। होरत्ती ने कहा कि उन्होंने संविधान और विधान परिषद के नियमों की समीक्षा के बाद अपना निर्णय लिया।
होरत्ती ने कहा, 'सभापति ने 19 दिसंबर 2024 को बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध में हुई घटना के बारे में भारत के संविधान, कर्नाटक विधान परिषद के नियम, लोकसभा और राज्यसभा के नियम, कौल और शकटर के संसद के नियम, और सुभाष कश्यप की बालिमंतोरी प्रक्रियाओं की जांच करने के बाद पहले ही अपना फैसला ले लिया है।'
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मामला सदन के अंतर्गत, इस पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए: होरत्ती
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभापति के रूप में उनके पास संसदीय प्रक्रिया को नियंत्रित करने और सदस्यों को अनुशासन में रखने की शक्ति है। इसलिए, वह इस मामले में कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं चाहते हैं। होरत्ती ने कहा कि यह मामला सदन के अंतर्गत आता है और इस पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए ताकि विधायिका और कार्यपालिका के बीच टकराव न हो।
जी परमेश्वर बोले- होरत्ती के पत्र के बारे में मीडिया से मिली जानकारी
इस पर राज्य के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने रविवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संवाददातों से कहा कि उन्हें होरत्ती का पत्र नहीं मिला, लेकिन मीडिया से इसकी जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि वह पहले पत्र को देखेंगे और उसके बाद कानूनी सलाह लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सीआईडी को मामला सौंपा गया है ताकि घटना की सच्चाई का पता लगाया जा सके। पुलिस ने 19 दिसंबर को सीटी रवि के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी और उसे उसी दिन गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया।