कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा है कि राज्य में नेतृत्व को लेकर कांग्रेस के भीतर मौजूद किसी भी भ्रम को अब स्थानीय स्तर पर ही सुलझाया होगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के निर्देश हैं। गृह मंत्री ने दोहराया कि उनका एकमात्र इरादा यह है कि प्रशासन में कोई बाधा न आए और जनता से किए गए वादों को प्राथमिकता दी जाए।
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार को स्पष्ट किया कि राज्य में नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर व्याप्त किसी भी भ्रम या मतभेद को अब स्थानीय स्तर पर ही सुलझाना होगा, क्योंकि (एआईसीसी) अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से इस संबंध में सीधे निर्देश मिले हैं। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने खरगे के साथ अपने आवास पर हुई मुलाकात को पूरी तरह निजी और पारिवारिक बताते हुए कहा कि इसमें राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
खरगे से मुलाकात के बाद परमेश्वर ने पत्रकारों से कहा, 'मैं कांग्रेस अध्यक्ष से मिला, लेकिन हमारा रिश्ता अलग है। हमारा पारिवारिक रिश्ता है। इसलिए, मैंने पारिवारिक मामलों पर चर्चा की, राजनीति पर नहीं। मैंने उनसे राजनीति का एक शब्द भी नहीं कहा।' हालांकि, खरगे के पिछले बयान का हवाला देते हुए परमेश्वर ने कि अगर कांग्रेस अध्यक्ष ने खुद कहा है कि स्थानीय नेताओं को अपने विवाद खुद सुलझाने चाहिए और इसमें हाईकमान की कोई भूमिका नहीं है। अब सभी नेताओं को एक साथ बैठकर इसका समाधान निकालना होगा।
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उनका यह बयान खरगे के उस बयान के एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी की कर्नाटक इकाई में नेतृत्व के मुद्दे पर भ्रम केवल स्थानीय स्तर पर है, न कि पार्टी हाईकमान के भीतर। उन्होंने यह भी कहा था कि स्थानीय नेताओं को हाईकमान को दोष देने के बजाय आंतरिक विवादों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
मामले को लेकर गृह मंत्री ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार 26 दिसंबर को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के लिए दिल्ली जा सकते हैं, जहां हाईकमान से उनकी मुलाकात संभव है। गृह मंत्री ने दोहराया कि उनका एकमात्र इरादा यह है कि प्रशासन में कोई बाधा न आए और जनता से किए गए वादों को प्राथमिकता दी जाए।
इस बीच, तुमकुर के संतों ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाने और राज्य में 'दलित सीएम' की बढ़ती मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए परमेश्वर ने कहा कि यह उन लोगों की भावना है जिसे वह गलत नहीं कहेंगे। बता दें कि नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में परमेश्वर को दलित समुदाय से मुख्यमंत्री पद के एक प्रमुख दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।