कर्नाटक केपीएससी के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार को आज राज्यपाल ने मंत्रिमंडल की सलाह पर फिर निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई तब हुई, जब 18 अगस्त को हाईकोर्ट ने उनका पिछला निलंबन रद्द कर सात दिनों में बहाली का आदेश दिया था। अब सवाल है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने किस आधार पर नई कार्रवाई की? केपीएससी के कामकाज पर इसका क्या असर पड़ेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
कर्नाटक लोक सेवा आयोग यानी केपीएससी के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को लेकर आज फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कर्नाटक के राज्यपाल ने राज्य मंत्रिमंडल की सलाह पर साहूकार को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 317(2) के तहत की गई है। खास बात यह है कि इससे एक सप्ताह पहले ही कर्नाटक हाईकोर्ट ने उनके निलंबन को रद्द करते हुए बहाली का आदेश दिया था।
राज्यपाल ने फिर साहूकार को क्यों निलंबित किया?
राज्यपाल ने मंत्रिमंडल की सलाह और कर्नाटक हाईकोर्ट के 18 अगस्त 2026 के आदेश के अनुरूप केपीएससी अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को निलंबित किया। आदेश में कहा गया है कि यह निलंबन भारत के राष्ट्रपति के अगले आदेश तक जारी रहेगा। इस दौरान आयोग के अगले वरिष्ठतम सदस्य को अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर काम करने का निर्देश दिया गया है।
इससे पहले 18 अगस्त को कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्यपाल की ओर से 10 जुलाई को जारी साहूकार के निलंबन आदेश को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि केपीएससी अध्यक्ष को निलंबित करने के लिए राज्य मंत्रिमंडल ने कोई सिफारिश नहीं की थी। इसलिए राज्यपाल का आदेश कानूनी रूप से कायम नहीं रह सकता। अदालत ने साहूकार को सात दिनों के भीतर पद पर बहाल करने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने बहाली के साथ कौन सी शर्त लगाई थी?
हाईकोर्ट ने साहूकार की बहाली का रास्ता साफ करते हुए यह भी कहा था कि वह अपनी बेटियों की नियुक्ति से जुड़े किसी भी मामले में निर्णय नहीं लेंगे। साहूकार की ओर से अदालत में यह दलील दी गई थी कि संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के खिलाफ जांच की प्रक्रिया में राज्यपाल और राष्ट्रपति की भूमिका तय है। इसी आधार पर उनके निलंबन की वैधता पर सवाल उठाया गया था।
केपीएससी को लेकर विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
यह पूरा घटनाक्रम केपीएससी की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच हो रहा है। पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में कथित गड़बड़ियों की जांच भी जारी है। इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कर्नाटक और अहमदाबाद में 21 स्थानों पर छापेमारी की थी। ऐसे में साहूकार के निलंबन और हाईकोर्ट से राहत के बाद दोबारा हुई कार्रवाई ने केपीएससी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल और बढ़ा दिए हैं।