आयकर विभाग ने कर्नाटक के कुछ सहकारी बैंकों पर छापा मारकर 1,000 करोड़ रुपये के फर्जी खर्च और कथित वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने मंगलवार को कहा कि कुछ समय पूर्व यह कार्रवाई की गई थी।
आयकर विभाग को संदेह था कि ये बैंक ‘अपने ग्राहकों की विभिन्न व्यावसायिक संस्थाओं के धन को इस तरह से इधर-उधर कर रहे हैं, ताकि उन्हें कर देनदारी से बचाया जा सके। इसके बाद इन बैंकों के 16 परिसरों में 31 मार्च को तलाशी शुरू की गई। सीबीडीटी ने कहा कि तलाशी के दौरान 3.3 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और दो करोड़ रुपये के आभूषण जब्त किए गए।
काल्पनिक संस्थाओं के नाम पर चल रहा था चेक भुनाने का खेल
बोर्ड ने कहा, जब्त किए गए सबूतों से पता चला है कि ये सहकारी बैंक विभिन्न व्यापारिक संस्थाओं की ओर से काल्पनिक संस्थाओं के नाम पर जारी किए गए धारक चेक को भुनाने में शामिल थे। इन व्यावसायिक संस्थाओं में ठेकेदार, रियल एस्टेट जैसी कंपनियां शामिल हैं। इस तरह के धारक चेक को भुनाने में केवाईसी मानदंडों का पालन नहीं किया गया।
आयकर विभाग के अनुसार, छूट के बाद राशि इन बैंकों के साथ बनाए गए कुछ सहकारी समितियों के बैंक खातों में भी जमा की गई थी। इसके अलावा यह भी पता चला है कि कुछ सहकारी समितियों ने बाद में अपने खातों से नकदी में धन वापस ले लिया और व्यावसायिक संस्थाओं को नकद वापस कर दिया। चेकों की इस तरह की छूट का उद्देश्य नकदी निकासी के वास्तविक स्रोत को छिपाना था। विभाग का मानना है कि इस कार्यप्रणाली में सहकारी समितियों को गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है। सीबीडीटी ने बताया, "इन लाभार्थी व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा लगभग 1,000 करोड़ रुपये का फर्जी खर्च दिखाया गया।
साथ ही इन बैंकों ने बिना नकद जमा किए ही एफडीआर खोलने की अनुमति दी और बाद में संपार्श्विक के रूप में उसी का उपयोग करके लोन को स्वीकार किया। सीबीडीटी ने कहा कि इन सहकारी बैंकों का प्रबंधन उनकी अचल संपत्ति और अन्य व्यवसायों के माध्यम से "बेहिसाब" धन की कमाई करने में शामिल था।