अदालत ने व्यक्ति के खिलाफ पहली पत्नी द्वारा दायर बहुविवाह के मामले को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी ने तीन महिलाओं का पति होने की बात स्वीकारी है, जो इसे एक ‘निरंतर अपराध’ बनाती है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने महज देरी को आधार मानकर बहुविवाह (बिगमी) के खिलाफ कार्यवाही खत्म करने से इनकार कर दिया है। इसके चलते तीन महिलाओं से शादी करने वाले एक 76 वर्षीय शख्स को अब तीसरी पत्नी के साथ मुकदमा झेलना पड़ेगा।
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अदालत ने व्यक्ति के खिलाफ पहली पत्नी द्वारा दायर बहुविवाह के मामले को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी ने तीन महिलाओं का पति होने की बात स्वीकारी है, जो इसे एक ‘निरंतर अपराध’ बनाती है। ऐसे में मामला दर्ज कराने में देरी का तर्क बेमानी हो जाता है, क्योंकि बहुविवाह अब भी जारी है।
दो बहनों समेत तीन शादियां, 25 साल बाद मामला दर्ज
आनंद सी की पहली पत्नी चंद्रम्मा ने आरोपी व 49 वर्षीय तीसरी पत्नी वरालक्ष्मी समेत उसके चार मित्रों-रिश्तेदारों के खिलाफ बहुविवाह व इसके लिए उकसाने का मामला दर्ज कराया था। आनंद ने चंद्रम्मा से 1968 में शादी की थी। 1972 में पहली पत्नी की बहन सवित्राम्मा से भी विवाह कर लिया। आनंद का दावा है कि चंद्रम्मा की सहमति से दूसरी शादी हुई थी। 1993 में आरोपी वरालक्ष्मी से भी विवाह बंधन में बंध गया व हाईकोर्ट में उसने दावा किया कि दोनों पत्नियों ने तीसरी शादी की मंजूरी दी थी।