कर्नाटक हाईकोर्ट ने ईशा योग केंद्र के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। बता दें कि यह याचिका ईशा योग केंद्र के चिकबल्लापुरा केंद्र में निर्माण कार्यों पर रोक लगाने के उद्देश्य से दायर की गई थी। जनहित याचिका में आरोप लगाए गए थे कि ईशा योग केंद्र के निर्माण से नंदी पहाड़ी की पारिस्थितिकी नष्ट हो रही है। हालांकि सदगुरू के ईशा योग केंद्र का निर्माण असल में नंदी पहाड़ी से 31 किलोमीटर दूर है।
जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि सरकार ने अवैध रूप से ईशा योग केंद्र को यह जमीन दी है लेकिन ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उन्होंने जमीन खरीदी है और इसके लिए सभी जरूरी इजाजत ली गई है। ईशा फाउंडेशन ने साफ किया कि उन्होंने सरकार से कोई मदद नहीं ली है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान ईशा फाउंडेशन ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की भी जानकारी नहीं दी है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व फैसलों और कर्नाटक हाईकोर्ट के जनहित याचिका के नियमों का उल्लंघन है।
बता दें कि चिकबल्लापुर में ईशा के योग केंद्र के निर्माण के खिलाफ क्याथप्पा एस और चिक्कबल्लापुर के कुछ ग्रामीणों ने जनहिता याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में केंद्रीय पर्यावरण वन मंत्रालय, कर्नाटक सरकार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, ईशा योग केंद्र समेत 16 को प्रतिवादी बनाया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि योग केंद्र के आध्यात्मिक गुरु के इशारे पर अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन कर योग केंद्र स्थापित करने की अनुमति दी और प्रसिद्ध नंदी पहाड़ी के आधार में एक निजी फाउंडेशन स्थापित करने दिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि इससे नंदी पहाड़ी के मूल क्षेत्र में पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो रहा है। इसका असर इस इलाके में रहने वाले लोगों और उनकी आजीविका पर पड़ रहा है।