भगोड़े कारोारी विजय माल्या की शाही जीवनशैली और अहंकार पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा, भोग-विलास की आदत दशकों की मेहनत बर्बाद कर सकती है। आखिर बैंकों के कर्ज और शेयर विवाद में अदालत ने क्या कुछ कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को लेकर एक बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा, किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमोटर विजय माल्या की तड़क-भड़क वाली जीवनशैली भोग-विलाश और उनका अहंकार ही बैंकों का कर्ज चुकाने में सबसे बड़ी रुकावट है।
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जस्टिस डीके सिंह और जस्टिस टीएम नदाफ की बेंच ने यह टिप्पणी डियाजियो होल्डिंग्स नीदरलैंड्स बीवी और एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम के बीच चल रहे एक शेयर विवाद के मामले में राहत देते हुए की।
कोर्ट ने एक रिपोर्ट के अनुसार नोट किया कि जब किसी का ध्यान वित्तीय अनुशासन और काम से हटकर 'व्यक्तिगत अहंकार, बड़े ईगो और अत्यधिक भोग' पर चला जाता है, तो दशकों की मेहनत बर्बाद हो जाती है। अनुशासन की जगह जब केवल खुद को बड़ा दिखाने की आदत आ जाती है, तो नतीजा कंगाली और बर्बादी ही होता है। यह विवाद यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड के उन शेयरों को लेकर था जो एक लोन के सिलसिले में गिरवी रखे गए थे।
कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इन शेयर्स पर डियाजियो का दावा बैंकों के कंसोर्टियम के दावों से पहले और अधिक मजबूत है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए 6,203 करोड़ रुपये के मूल लोन के मुकाबले 14,131.6 करोड़ मूल्य की संपत्ति पहले ही बरामद कर ली है।