उच्च न्यायालय की कलबुर्गी पीठ के न्यायमूर्ति हेमंत चंदनगौदर की एकल पीठ ने अलाउद्दीन और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं को स्वीकार किया और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 504, 505, 505 (2), 124ए, 153ए और 34 के तहत उनके खिलाफ शुरू किए गए अभियोजन को रद्द कर दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता अमीत कुमार देशपांडे याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में पेश हुए। उन्होंने पुष्टि की कि अदालत ने सभी कार्रवाइयों को रद्द कर दिया है और एक विस्तृत आदेश के प्रतिलिपि (ऑर्डर कॉपी) का इंतजार है।
छात्रों ने 2020 में सीएए और एनआरसी पर एक नाटक का मंचन किया था। इसके बाद कार्यकर्ता नीलेश रक्षला की शिकायत के आधार पर बीदर न्यू टाउन पुलिस स्टेशन में स्कूल के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उनपर 'राष्ट्र विरोधी गतिविधियों' और संसदीय कानूनों के बारे में 'नकारात्मक राय फैलाने' के लिए राजद्रोह का आरोप लगाया गया था।