कर्नाटक में मुडा जमीन आवंटन मामले में ईडी ने भी सीएम की पत्नी को 14 साइटों के आवंटन में अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया था। ईडी के अनुसार मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी बीएम पार्वती को 14 साइटों के हस्तांतरण में कई अनियमितताओं के सबूत मिले हैं।
मुडा मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती और राज्य मंत्री बिरथी सुरेश को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मामले में दोनों को पेशी के लिए ईडी की ओर से दिए गए नोटिस को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी है। हाईकोर्ट ने सुनवाई को 20 फरवरी दोपहर 2:30 बजे के लिए टाल दिया है। तब तक दोनों को ईडी के सामने पेशी से अंतरिम राहत जारी रहेगी।
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कर्नाटक में मुडा जमीन आवंटन मामले में 25 सितंबर को विशेष अदालत के आदेश के बाद 27 सितंबर को लोकायुक्त पुलिस ने सीएम सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती और पत्नी के भाई मल्लिकार्जुन स्वामी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। मामले में ईडी ने भी सीएम की पत्नी को 14 साइटों के आवंटन में अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया था। ईडी के अनुसार मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी बीएम पार्वती को 14 साइटों के हस्तांतरण में कई अनियमितताओं के सबूत मिले हैं।
ईडी ने कहा था कि पार्वती को भूमि हस्तांतरण में वैधानिक दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ था। एजेंसी ने कार्यालय प्रक्रियाओं में गड़बड़ी, अनुचित पक्षपात और प्रभाव का उपयोग और हस्ताक्षरों की जालसाजी के सबूत भी पाए हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि उसे इस बात के सबूत मिले हैं कि सिद्धरमैया के निजी सहायकों में से एक एसजी दिनेश कुमार उर्फ सीटी कुमार ने इस प्रक्रिया में अनुचित प्रभाव का इस्तेमाल किया। अधिकांश आवंटन बेनामी या नकली व्यक्तियों के नाम पर किए गए हैं। ईडी ने मामले में सिद्धारमैया की पत्नी को हाजिर होने के लिए नोटिस दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की।
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MUDA घोटाला क्या है?
मुडा घोटाला मुआवजा स्थलों के आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। यह घोटाला 3.2 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसे मुख्यमंत्री की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुनस्वामी ने 2010 में उपहार में दिया था। MUDA द्वारा जमीन अधिग्रहण के बाद पार्वती ने मुआवजे की मांग की और इसके बाद उन्हें 14 प्लॉट आवंटित किए गए। आरोप है कि ये प्लॉट मूल भूमि की कीमत से काफी ज्यादा कीमत के हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि ये घोटाले 3000-4000 करोड़ रुपये के बीच का हो सकता है।
आरटीआई कार्यकर्ता ने इस मामले में सीएम की पत्नी पार्वती सहित कई राजनेताओं की कथित संलिप्तता का दावा किया है। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय अधिकारियों की समिति नियुक्त की है। हाल ही में सिद्धारमैया ने मुडा द्वारा 62 करोड़ रुपये का मुआवजा देने पर आवंटित प्लॉट वापस करने की पेशकश भी की थी। अब सरकार ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज पीएन देसाई के नेतृत्व में भी एक जांच आयोग गठित किया है।