मंदिर बिल के नए प्रावधानों के तहत, 10 लाख तक आय वाले मंदिरों को अब परिषद को धन नहीं देना होगा। 10 लाख से एक करोड़ तक आय वाले मंदिरों से 5 प्रतिशत और एक करोड़ से अधिक आय वाले मंदिरों से 10 प्रतिशत धनराशि ली जाएगी।
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान एवं धर्मार्थ निधि (संशोधन) बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए सुरक्षित रखा है। यह बिल कम आय वाले मंदिरों में सेवारत पुजारियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस विधेयक को कर्नाटक विधानसभा ने 6 मार्च, 2024 को पारित किया था और 16 मई, 2025 को राज्यपाल के पास फिर से प्रस्तुत किया गया। धार्मिक निधि विभाग के एक सूत्र ने बताया कि इसका उद्देश्य अधिक आय वाले मंदिरों से धन एकत्र करके कम आय वाले मंदिरों के पुजारियों के जीवनस्तर को सुधारना है।
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धार्मिक एंडोमेंट मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बताया कि राज्य में 3,000 सी-ग्रेड मंदिर हैं, जहां से धार्मिक परिषद को कोई धन नहीं मिलता। बी-ग्रेड मंदिरों (5 लाख से 25 लाख आय) से 5 प्रतिशत और 25 लाख से अधिक आय वाले मंदिरों से 10 प्रतिशत धनराशि परिषद को दी जाती है।
नए प्रावधानों के तहत, 10 लाख तक आय वाले मंदिरों को अब परिषद को धन नहीं देना होगा। 10 लाख से एक करोड़ तक आय वाले मंदिरों से 5 प्रतिशत और एक करोड़ से अधिक आय वाले मंदिरों से 10 प्रतिशत धनराशि ली जाएगी। यह राशि धार्मिक परिषद को दी जाएगी, जिससे राज्य के 40,000 से 50,000 पुजारियों को सहायता प्रदान की जाएगी। अब बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है। राज्य सरकार का मानना है कि इससे छोटे मंदिरों के पुजारियों को बेहतर वित्तीय सहायता मिलेगी।