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‘दिल्ली के रिमोट से चल रही कर्नाटक सरकार’: बंगलूरू में पार्क बिल पर बवाल; भाजपा ने शिवकुमार को बताया डमी सीएम

Fri, 04 Sep 2026 05:36 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, बंगलूरू

सार

कर्नाटक में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सीएम डी.के. शिवकुमार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘डमी’ और ‘रिमोट-कंट्रोल्ड’ मुख्यमंत्री करार दिया। इसके साथ ही  उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के कर्नाटक दौरे पर हमला बोला।
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डीके शिवकुमार, मुख्यमंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कर्नाटक में प्रस्तावित पार्क संशोधन विधेयक को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता और कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने शुक्रवार को डी.के. शिवकुमार पर हमला बोलते हुए उन्हें ‘डमी’ और ‘रिमोट-कंट्रोल्ड’ मुख्यमंत्री बताया है।  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अशोक ने दावा किया कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के दौरे से यह साफ हो गया है कि कर्नाटक सरकार दिल्ली से नियंत्रित होती है। भाजपा के विरोध के बीच राज्य सरकार ने 5 प्रतिशत पार्क जमीन के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधान वाले विधेयक को फिलहाल वापस ले लिया है। सरकार इसे चर्चा और सुझावों के बाद अगले विधानसभा सत्र में दोबारा पेश करने की तैयारी में है।

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'सुरजेवाला के दौरे ने खोली सरकार की ‘हकीकत’' 
राज्य सरकार पर हमला करते हुए सुरजेवाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'तो आर.एस. सुरजेवाला ने आखिरकार उस बात की पुष्टि कर दी है, जो 7 करोड़ कन्नड़ लोग पहले से जानते थे: डी.के. शिवकुमार एक डमी सीएम हैं। डीकेएस एक रिमोट-कंट्रोल्ड सीएम हैं। और कर्नाटक के अब तक के सबसे कमजोर CM हैं।' अपने पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आलाकमान ने राज्य सरकार को पार्क की जमीन के इस्तेमाल से जुड़े विवादित 5 प्रतिशत वाले प्रावधान को वापस लेने के लिए मजबूर किया है।

'दिल्ली ने सख्ती दिखाई तो डीकेएस ने घुटने टेक दिए'
अशोक ने आगे कहा, 'सबसे पहले, आपकी कांग्रेस कर्नाटक सरकार ने पार्क की जमीन के इस्तेमाल से जुड़े विवादित 5 प्रतिशत वाले प्रावधान को लागू करने की कोशिश की, जिससे बेंगलुरु की कीमती हरियाली (ग्रीन स्पेस) खतरे में पड़ गई। फिर भाजपा ने इसका पर्दाफाश किया। कन्नड़ लोगों ने आवाज उठाई। जनता का गुस्सा फूट पड़ा। और अचानक, 'स्ट्रॉन्गमैन' सीएम को पीछे हटने की कला समझ आ गई। दिल्ली ने सख्ती दिखाई तो डीकेएस ने घुटने टेक दिए। बिल वापस ले लिया गया।'
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‘शिवकुमार ने कन्नड़ लोगों की नहीं, आलाकमान की बात सुनी’
अशोक ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कन्नड़ लोगों की आवाज सुनने के बजाय कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों को प्राथमिकता दी। और कितनी शर्म की बात है सीएम डी.के. शिवकुमार? आपने कन्नड़ लोगों की बात नहीं सुनी। आपने आलाकमान की बात सुनी। और भाजपा की लगातार लड़ाई को 'झूठ' कहने से सच्चाई नहीं बदलेगी: कर्नाटक भाजपा ने लड़ाई लड़ी। लोगों ने विरोध किया। आपकी सरकार झुक गई। घुटने टेकने को 'जवाबदेही' का नाम मत दीजिए। यह लीडरशिप नहीं थी। यह रिमोट-कंट्रोल से किया गया सरेंडर था। 

भाजपा ने पार्क की जमीन को लेकर जताई थी आपत्ति
भाजपा ने पार्क की 5 प्रतिशत जमीन का इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए करने की अनुमति देने वाले प्रावधान का विरोध किया था। पार्टी का तर्क था कि इससे बेंगलुरु की हरियाली और ग्रीन कवर को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, कांग्रेस सरकार का कहना था कि जनता की प्रतिक्रिया के बाद इस प्रावधान को वापस लिया गया है। राज्य सरकार ने गुरुवार को प्रस्तावित ‘पार्क्स अमेंडमेंट बिल’ यानी पार्क संशोधन विधेयक को फिलहाल वापस ले लिया है। सरकार बिल को चर्चा और सलाह-मशविरे के लिए सार्वजनिक करने के बाद विधानसभा के अगले सत्र में दोबारा पेश करेगी।

क्या है पार्क संशोधन विधेयक का मकसद?
इस विधेयक का मकसद ‘सरकारी पार्क और पार्क संरक्षण अधिनियम’ में संशोधन करना था, ताकि सार्वजनिक कार्यों के लिए पार्क की 5 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण किया जा सके।

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प्रियांक खरगे बोले- व्यापक चर्चा की जरूरत
इससे पहले कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा था कि मुख्यमंत्री शिवकुमार इस बिल को अहम मानते हैं और उनका मानना है कि इस पर व्यापक चर्चा की जरूरत है। इसलिए आज हमने कैबिनेट में उस बिल को वापस ले लिया है और हम इसे चर्चा के लिए विधानसभा में दोबारा पेश कर रहे हैं। हम बिल में एक भी फुल स्टॉप या कॉमा नहीं बदल रहे हैं। हम चर्चा के लिए तैयार हैं। अगर जनता की ओर से अच्छे सुझाव आते हैं, तो हम उन्हें अपनाएंगे।

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