कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा अपने बेटे के लिए परंपरागत विधानसभा सीट छोड़ेंगे। उन्होंने शुक्रवार को एलान किया कि वह विधानसभा चुनाव में अपने बेटे बीवाई विजयेंद्र के लिए अपनी शिकारीपुरा सीट छोड़ देंगे। विजयेंद्र पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि अगले विधानसभा चुनाव में विजयेंद्र शिकारीपुरा सीट से लड़ेंगे। येदियुरप्पा की घोषणा को उनकी चुनावी राजनीति की समाप्ति माना जा रहा है। इस बीच येदियुरप्पा के लिए शीर्ष कोर्ट से राहत भरी खबर आई। सुप्रीम कोर्ट ने बीएस येदियुरप्पा द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।
मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं: पूर्व सीएम
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं। विजयेंद्र शिकारीपुरा से चुनाव लड़ेंगे। मैं हाथ जोड़कर शिकारीपुरा की जनता से प्रार्थना करता हूं कि वह मुझसे भी ज्यादा समर्थन मेरे बेटे का करें और उन्हें अधिक अंतर से उन्हें जीत दिलाएं। पुराने मैसुरु क्षेत्र से विजयेंद्र को लड़ाने की मांग को लेकर पूछे गए सवाल पर येदियुरप्पा ने कहा कि उन पर वहां से लड़ने का बहुत दबाव है, लेकिन मैं सीट खाली कर रहा हूं और चुनाव नहीं लड़ूंगा। इसलिए विजयेंद्र शिकारीपुरा से चुनाव लड़ेंगे।
कर्नाटक इकाई के उपाध्यक्ष हैं विजयेंद्र
विजयेंद्र को जुलाई 2020 में भाजपा की कर्नाटक इकाई का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। मई 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में मैसुरु के वरुणा से टिकट देने से इनकार करने के कुछ समय बाद ही उन्हें भाजपा की युवा इकाई का महासचिव नियुक्त किया गया था। पार्टी में उनका कद उस समय और बढ़ गया जब 2019 में उन्हें केआर पेट और 2020 में सिरा विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में जीत मिली।
इस मामले में कोर्ट से राहत
सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा को राहत देते हुए भूमि की अधिसूचना जारी करने से संबंधित भ्रष्टाचार के एक मामले में उनके खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट के 2020 के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। दरअसल, हाईकोर्ट ने येदियुरप्पा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत दर्ज एक आपराधिक शिकायत को रद्द करने से 22 दिसंबर 2020 को इनकार कर दिया था। येदियुरप्पा के फरवरी 2006 से अक्तूबर 2007 तक उपमुख्यमंत्री रहने के दौरान भूमि के कुछ हिस्से को गैर अधिसूचित करने और उद्यमियों को आवंटित करने का उन पर आरोप लगाया गया था।