कर्नाटक में हाल ही में दिल के दौरे से हुई मौतों की जांच करने वाली विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोविड-19 संक्रमण या कोविड वैक्सीन लेने और दिल की बीमारी के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। इसके उलट, रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 टीकाकरण लंबे समय में दिल की बीमारियों से बचाव में मददगार साबित हुआ है।
कर्नाटक के हसन जिले में हाल ही में दिल का दौरा पड़ने से 20 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। राज्य सरकार ने इसकी जांच करने के लिए जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. रवींद्रनाथ की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था।
युवाओं में अचानक दिल की बीमारियां बढ़ाने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं
विशेषज्ञ समिति ने दो जुलाई को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसमें कहा गया है कि 'लॉन्ग कोविड' (कोविड का लंबे समय तक रहने वाला असर) के कारण युवाओं में अचानक दिल की बीमारियां बढ़ने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'इसके बजाय, हृदय रोग (उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, डिस्लिपिडेमिया) को जन्म देने वाले सामान्य जोखिम कारकों के प्रसार में वृद्धि अचानक हृदय संबंधी घटनाओं में वृद्धि के लिए सबसे अच्छी व्याख्या है।'
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45 वर्ष से कम आयु के 251 मरीजों का किया गया अवलोकन
जयदेव अस्पताल में एक अप्रैल से 31 मई 2025 के बीच हृदय संबंधी समस्याओं के साथ आए 45 वर्ष से कम आयु के 251 रोगियों का अवलोकन किया गया। अध्ययन के लिए चुने गए रोगियों का पैरा-मेडिकल स्टाफ द्वारा साक्षात्कार लिया गया और एक प्रोफार्मा भरा गया। अध्ययन के बाद विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि अधिकांश मरीजों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, डिस्लिपिडेमिया और धूम्रपान जैसे पारंपरिक जोखिम कारक प्रचलित थे। पैनल की रिपोर्ट के अनुसार, अचानक हृदय संबंधी मौतों में देखी गई वृद्धि के पीछे कोई एक कारण नहीं है। बल्कि, यह व्यवहार, आनुवंशिक और पर्यावरणीय जोखिमों के साथ एक बहुक्रियात्मक मुद्दा प्रतीत होता है।
मुख्यमंत्री ने मौतों के पीछे टीकाकरण बताई थी वजह
हाल ही में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा था कि हसन जिले में दिल के दौरे से हुई मौतें टीकाकरण की वजह से हो सकती हैं। उन्होंने दावा किया कि टीकों को जल्दबाजी में मंजूरी दी गई थी। उनके इस बयान की भाजपा और बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार-शॉ ने तीखी आलोचना की थी।
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रिपोर्ट में यह दिए गए सुझाव
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में सुझाव दिए गए हैं कि युवाओं में अचानक होने वाली दिल की बीमारियों पर नजर रखने के लिए निगरानी व्यवस्था बनानी चाहिए। मौत के बाद की जांच (पोस्टमार्टम) का डेटा इकट्ठा करने के लिए एक सिस्टम बनाना चाहिए। स्कूल स्तर पर ही दिल से जुड़ी जांच शुरू की जानी चाहिए। वैक्सीन और कोविड संक्रमण का दिल पर लंबे समय तक क्या असर पड़ता है, इसे समझने के लिए बड़े स्तर पर और गहराई से स्टडी होनी चाहिए।