इस जनादेश के मायने
कांग्रेस को भारत जोड़ो यात्रा से फायदा दिख रहा। वहीं, सरकार में हुए भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के मुद्दे को पार्टी ने प्रचार के दौरान खूब भुनाया। दूसरी ओर, भाजपा को अंदरूनी लड़ाई का खामियाजा भुगतना पड़ा।
स्थानीय नेताओं के संघर्ष किनारे कर मुद्दों पर केंद्रित रही कांग्रेस
शिवकुमार और सिद्धरमैया के आपसी संघर्ष को कांग्रेस ने न केवल किनारे रखा, बल्कि दोनों को एक साथ दिखाने में भी कामयाब रही। उसने अपना चुनाव प्रचार स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रखा।
ध्रुवीकरण का भाजपा से कहीं ज्यादा फायदा कांग्रेस को हुआ
कांग्रेस ने बजरंग दल को प्रतिबंधित पीएफआई से जोड़ा। इससे ध्रुवीकरण बढ़ा। भाजपा की ओर से भी कड़े विरोधी बयान आए। साफ है कि इससे भाजपा को बहुत फायदा नहीं मिला, लेकिन कांग्रेस कई गुना फायदे ले गई।
सत्ता विरोधी वोट पर पीएम की रैली का भी नहीं हुआ असर
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का काफी हिस्सा कर्नाटक से गुजरा, इसका असर उन वोटराेें पर पड़ा, जो प्रदेश की भाजपा सरकार से नाराज थे। पीएम मोदी की रैलियों व प्रचार का भी खास असर नहीं हुआ।
बड़ी संख्या में मंत्रियों की हार, मुख्यमंत्री बोम्मई की जीत
भाजपा की बसवराज सरकार में मंत्री बी श्रीरामुलु, जेसी मधु स्वामी, मुरुगेश निरानी, बीसी नागेश समेत कई नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, सीएम बसवराज बोम्मई ने शिवमोगा में जीत दर्ज की।
भाजपा का प्रदर्शन नहीं जगाता भविष्य के लिए कोई उम्मीद
भाजपा के लिए चिंता। तमिलनाडु और केरल में पिछले चुनावों में उसका प्रदर्शन भविष्य के लिए भी कोई आशा नहीं जगाता।
बेल्लारी-रेड्डी व कांग्रेस के सहयोगी पुत्तननैया जीते
कल्याण राज्य प्रगति पक्ष के जी जनार्दन रेड्डी ने कांग्रेस के इकबाल अंसारी को 8 हजार वोटों से हराकर यहां अपनी पकड़ बरकरार रहने का संदेश दिया। वहीं, कांग्रेस सहयोगी सर्वोदय कर्नाटक पक्ष के प्रत्याशी दर्शन पुत्तननैया ने जेडीएस के पुट्टाराजू को हराया।