जेडीएस के गठबंधन का पुराना इतिहास
कर्नाटक में तीन बार ऐसी स्थिति बन चुकी है। पहली बार 2004 में ऐसा हुआ था। इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'जेडीएस ने पहली बार कर्नाटक में 1999 में चुनाव लड़ा था। तब पार्टी को 10 सीटें मिली थीं। इसके बाद 2004 में जेडीएस ने बड़ी सफलता हासिल की। 10 से सीटों का आंकड़ा बढ़कर 54 पहुंच गया। तब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। पार्टी के 79 विधायक चुने गए थे। कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी। कांग्रेस के 65 उम्मीदवार चुनाव जीते थे। जेडीएस ने पहली बार कांग्रेस को सहारा दिया और सरकार बना ली। इस तरह पहली बार JDS किंग मेकर बनी। पहले एक साल 251 दिन के लिए कांग्रेस के धरम सिंह मुख्यमंत्री बने। फिर अगले एक साल 253 दिन जेडीएस के कुमारस्वामी ने सत्ता संभाली।'
उन्होंने आगे कहा कि जेडीएस ने इन पांच साल में कांग्रेस और भाजपा दोनों के साथ मिलकर सरकार बनाई, लेकिन कोई भी पूरी नहीं चली। 2007 में जेडीएस ने भाजपा को समर्थन दिया। बीएस येदियुरप्पा सात दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने और फिर सरकार गिर गई। इसके बाद एक साल तक सूबे में राष्ट्रपति शासन लगा रहा। 2008 में फिर चुनाव हुए। भाजपा ने 110 सीटें हासिल की और सरकार बना ली। 2008 से 2013 तक पांच साल में भाजपा ने तीन बार मुख्यमंत्री बदला। पहले बीएस येदियुरप्पा फिर सदानंद गौड़ा और बाद में जगदीश शेट्टार सीएम बने।
तीसरी बार 2018 में गठबंधन की स्थिति बनी। तब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, हालांकि बहुमत के आंकड़े से दूर थी। ऐसे में कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बना ली। भाजपा ने 104, कांग्रेस ने 80 और जेडीएस ने 37 सीटें जीतीं थीं। कांग्रेस ने जेडीएस के कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बना दिया। इस तरह से दूसरी बार कुमारस्वामी कम सीटों के बावजूद मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हुए।
हालांकि, उनकी यह पारी भी लंबी नहीं चल पाई। 2019 में कांग्रेस के 15 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद हुए फ्लोर टेस्ट में पार्टी 99-105 से हार गई और सरकार गिर गई। इसके बाद गवर्नर ने येदियुरप्पा को सरकार बनाने का आमंत्रण दिया और BJP ने सरकार बना ली। जेडीएस और कांग्रेस के कई विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया।
इस बार ऐसी स्थिति हुई तो किसके साथ जाएगी जेडीएस?
प्रो. अजय कुमार सिंह कहते हैं, 'तीन में से दो बार जेडीएस ने कांग्रेस का साथ दिया और एक बार भाजपा का। हर बार यह गठबंधन सफल नहीं रहा। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक स्थिति अलग है। जेडीएस को सत्ता में रहने की जरूरत है। अभी भाजपा केंद्र में है। ऐसे में जेडीएस चाहेगी कि इस बार जो भी गठबंधन बने वो पूरा पांच साल तक चले। ऐसी स्थिति में संभव है कि जेडीएस इस बार भाजपा को साथ दे दे। हालांकि, एचडी देवेगौड़ा व्यक्तिगत तौर पर भाजपा को समर्थन देने से परहेज करते आए हैं। उन्हें लगता है कि इसके चलते उनका कोर वोटर्स और मुस्लिम वोटर्स नाराज हो जाएगा। ऐसे में कांग्रेस की भी मजबूत दावेदारी है।'