दो दिन बाद कर्नाटक में चुनाव होने वाले हैं। वहीं आज चुनाव प्रचार खत्म हो जाएगा। लेकिन कर्नाटक की सियासत में चुनाव से पहले ऐसा खुलासा हुआ है जिससे आरआर नगर में होने वाला विधानसभा चुनाव अधर में लटक सकता है। मामले की जांच के लिए चुनाव आयोग ने उप-चुनाव आयुक्त चंद्र भूषण कुमार को मामले की जांच के लिए बंगलूरू भेजा है। वह बुधवार शाम को ही यहां पहुंच चुके हैं। दरअसल, आरआर नगर के जलाहली से मंगलवार को 10,000 वोटर आईडी कार्ड सीज किए गए हैं। हजारों फर्जी फॉर्म-6 को भी चुनाव आयोग ने सीज किया है।
स्थल पर पहुंचे उड़न दस्ते को वहां से कांग्रेस के वर्तमान विधायक एन मुनिरत्ना के पैंफलेट मिले। जिसके बाद जेडीएस और भाजपा ने यहां चुनाव रद्द करने की मांग की। हालांकि बाद में पता चला कि यह घर भाजपा नेता मंजुला का है। जिसमें उनका किराएदार और भाजपा कार्यकर्ता राकेश रहता है। राकेश मंजुला का करीबी रिश्तेदार भी है। इससे कांग्रेस को भाजपा पर उंगुली उठाने का एक और मौका मिल गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजीव कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह बहुत ही गंभीर मसला है और इसपर चुनाव आयोग नजर बनाए हुए है। इसे उप-चुनाव आयुक्त चंद्र भूषण कुमार के पास भेज दिया गया है। चुनाव आयोग जल्द ही रिपोर्ट के आधार पर इस मसले पर अंतिम निर्णय लेगा।
कुमार ने बताया कि उड़न दस्ते ने 9,896 इलेक्टोरल फोटो आईडी कार्ड (ईपीआईसी) जब्त किए हैं जो सभी असली थे। इसके साथ ही बृहत बंगलूरू नगर पालिका (बीबीएमपी) मुहरों के साथ 6,342 मतदाता आवेदन पावती रसीदें, बीबीएमपी मुहरों के बिना 20,700 मतदाता आवेदन पावती रसीदें, पांच लैपटॉप, तीन खराब प्रतिलिपी, 9 मोबाइल, पैन कार्ड्स और ड्राइविंग लाइसेंस सहित दूसरी चीजें सील की गई हैं। इन फर्जी ईपीआईसी कार्ड की कीमत अलग-अलग जगहों पर अलग है। जैसे उत्तर कर्नाटक के दूरवर्ती इलाके लंबानी टांडा में इसकी कीमत 100 रुपये है, लेकिन बेंगलूरू के स्लम इलाके में इसकी कीमत 2,000 रुपये तक हो सकती है। इसके जरिए अपने पसंदीदा उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालने का कार्य किया जा सकता था।
कुमार ने बताया कि चुनाव अधिकारियों ने कुछ ऐसे दस्तावेज सीज किए हैं जिससे पता चलता है कि अपराधियों ने फर्जी कार्ड बनाने से पहले घरेलू सर्वेक्षण किया है। इस सर्वे में उन्होंने शख्स का नाम, लिंग, उम्र, जाति, मोबाइल नंबर और यदि घर में कोई वृद्ध है तो उसके अकाउंट की डिटेल मांगी। सर्वे के दौरान घरों की तस्वीरें भी खींची गईं थी। जिनके जरिए असली जैसे फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनाए गए थे।
हालांकि, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि वोट चुराना आसान नहीं है। संजीव कुमार ने कहा कि
चुनाव आयोग को इस मामले में अगर कुछ सबूत मिलते हैं तो हमारे पास चुनाव रद्द कराने का अधिकार है। यदि किसी शख्स के पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है तो भी वह फोटो पहचान पत्र के जरिए भी वोट दे सकता है। स्पेशल कमिश्नर चुनाव (बीबीएमपी) मनोज आर रंजन ने बताया कि हमारे पास लोक प्रतिनिधि अधिनियम 1951 के तहत मजबूत प्रावधान है, जो चुनाव की गड़बड़ियों से निपटता है।