कर्नाटक में तमाम नाटक के बीच सत्ता संग्राम जारी है। कांग्रेस के नेता सिद्धारमैया ने कहा कि जब तक हमें उच्चतम न्यायालय के पिछले आदेश पर स्पष्टीकरण नहीं मिल जाता, इस सत्र में बहुमत परीक्षण कराना उचित नहीं होगा। इसे कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला दूसरे तरीके से समझाया। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। सुरजेवाला ने कहा कि आखिर न्यायालय ने अखिर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अपने विधायकों पर व्हिप जारी करने से क्यों रोक रहा है। आखिर बगैर व्हिप के बहुमत का परीक्षण कैसे हो सकता है? इस बीच विधानसभा में सात घंटे तक विश्वास मत पर चली चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष के रमेश कुमार ने सदन की कार्यवाही को शुक्रवार तक के स्थगित कर दिया।
धरने पर बैठ गए येदियुरप्पा
विधानसभा की कार्यवाही को विश्वासमत पर सात घंटे की चर्चा के बाद शुक्रवार तक के लिए स्थगित करना विधानसभा अध्यक्ष का विशेषाधिकार है, लेकिन भाजपा के विधायक भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में विधानसभा में ही रात भर के धरने पर बैठ गए। दरअसल बीएस येदियुरप्पा चाहते थे कि 18 जुलाई को ही विधानसभा में बहुमत परीक्षण हो जाए। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के विश्वास प्रस्ताव पेश करने के दौरान ही वह खड़े हो गए थे और विधानसभा अध्यक्ष से इसे एक ही दिन में पूरा कराने का अनुरोध किया था। इस पर मुख्यमंत्री ने बीएस येदियुरप्पा की जल्दबाजी पर तंज भी कसा था।
अब कांग्रेस ने खड़ा किया सवाल
उच्चतम न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश के अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसले में कहा है कि बागी विधायकों को बहुमत परीक्षण की कार्यवाही में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्हें सदन की कार्यवाही नें भाग लेने या न लेने का विकल्प दे दिया। इस तरह के आदेश के कारण 19 विधायक बहुमत परीक्षण में हिस्सा लेने नहीं आए। कांग्रेस पार्टी के अनुसार क्या उच्चतम न्यायालय का यह आदेश उसे संविधान की दसवीं सूची में मिले अधिकार के उपयोग से रोक सकता है? कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता के अनुसार इस मामले में कांग्रेस पार्टी नहीं है। फिर उसके अधिकार को उच्चतम न्यायालय इस तरह से कैसे रोक सकता है? कांग्रेस पार्टी के कानूनी मामलों के जानकार दिग्गज वकीलों को भी उच्चतम न्यायालय का फैसला हजम नहीं हो रहा है।
उच्चतम न्यायालय जा सकती है कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी उच्चतम न्यायालय से 17 जुलाई को दिए फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध कर सकती है। पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि कांग्रेस पार्टी कर्नाटक सरकार और बागी विधायकों के मामले में कहीं भी पक्षकार नहीं है। ऐसे में हमें सुना जाना चाहिए। अदालत का यह निर्णय पार्टी को संविधान की दसवीं सूची में मिले व्हिप के अधिकार की सही व्याख्या नहीं कर सकता। आखिर बिना व्हिप के बहुमत परीक्षण कैसे संभव है? गैर हाजिर रहने वाले विधायक तो कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर आए हैं। दूसरे राज्य में वर्तमान सरकार को अपदस्थ करने का षडयंत्र चल रहा है और उच्चतम न्यायालय ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है।
भाजपा और कांग्रेस की तू-तू, मैं-मैं
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा उसके विधायकों को लालच देकर धनबल पर खरीद रही है और भाजपा ऐसा करके एचडी कुमारस्वामी की सरकार को अपदस्थ करना चाहती है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता सिद्धारमैया खुलकर यह आरोप लगा रहे हैं। भाजपा के नेता बीएस येदियुरप्पा का कहना है कि इसमें भाजपा की कोई भूमिका नहीं है। कांग्रेस और जद(एस) के विधायक अपनी मर्जी से सरकार का साथ छोड़ रहे हैं। कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ गई है और उसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
कांग्रेस के नेता सिद्धारमैया, बीके हरिप्रसाद, गुलाम नबी आजाद सभी का कहना है कि बागी विधायक भाजपा की सह पर ऑपरेशन लोटस चला रहे हैं। यहां तक कि उच्चतम न्यायालय तक जाने में भी भाजपा बागी विधायकों को शह दे रही है। भाजपा के नेता कांग्रेस के इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर रहे हैं।
विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार
कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष केआर रमेश कुमार बहुत फूंक-फूंककर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके कदम उठा रहे हैं। केआर रमेश कुमार ने अभी तक कांग्रेस के 13 और जद(एस) के तीन विधायकों की सदस्यता पर कोई फैसला नहीं लिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों के इस्तीफा देने के बाद उनके इस्तीफा पर निर्णय नहीं लिया है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि विधायक के पास एक ने अपना इस्तीफा वापस लेने संबंधी जानकारी भेज दी है। यह विधानसभा अध्यक्ष के पास बचाव के उपाय की तरह है। क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा लेने के मामले में निर्णय करने पहले यह सुनिश्चित होने का अधिकार है कि कहीं विधायक किसी लालच, दबाब, प्रलोभन या किसी षडयंत्र का शिकार होकर तो ऐसा नहीं कर रहे हैं।
संसद में बैठे नेता दिन भर लेते रहे खबर
कर्नाटक विधानसभा में विश्वासमत पर चर्चा चल रही थी, लेकिन संसद में बैठे भाजपा और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की निगाह कर्नाटक पर टिकी थी। भाजपा के एक मंत्री करीब चार बजे राज्य में विश्वासमत के बारे में लॉबी में जानकारी लेते नजर आए। सूत्र बताते हैं कि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का भी ध्यान कर्नाटक के अपडेट पर था। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद लगातार कर्नाटक के डेवलपमेंट की जानकारी ले रहे थे। बीके हरिप्रसाद का भी ध्यान अपने राज्य पर था।
हो रहा है लोकतंत्र तार-तार
देश का लोकतंत्र अपनी मर्यादा से चलता है। संविधान की अवधारणा पर लोकतंत्र की बुनियाद है, लेकिन जिस तरह से कर्नाटक में मई 2018 से जुलाई 2019 तक राज्य में भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में पहले सरकार बनाने का प्रयास, फिर तीन दिन के भीतर इस्तीफा, एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार और सरकार बनने के एक साल के भीतर करीब छह बार सरकार के सामने पैदा हुआ संकट अप्रत्याशित है।