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कर्नाटक में कांग्रेस विधायक का फिर इस्तीफा: बोले- दबाव बनाने वालों की सुनती है सरकार, हमारी नहीं; विवाद क्यों?

Wed, 23 Sep 2026 04:19 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, बंगलूरू।

सार

कर्नाटक के कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटील ने इंडी तालुक को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किए जाने के विरोध में विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा भेजा है। उनका कहना है कि बारिश की कमी से खरीफ की फसलें सूख गई हैं और लोगों व पशुओं के लिए पानी की समस्या है। विजयपुरा के 13 में से 11 तालुक सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं, जबकि इंडी और चडचन बाहर हैं। पाटील अगस्त में भी इस्तीफा दे चुके थे, जिसे बाद में वापस ले लिया था।
 
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कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटील - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कर्नाटक के कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटील ने विजयपुरा जिले के इंडी विधानसभा क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किए जाने से नाराज होकर विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटील को अपना इस्तीफा भेज दिया है। पाटील ने कहा कि वह अपने क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का जवाब देने में खुद को असमर्थ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक माहौल में प्रभावशाली लोगों और दबाव बनाने वालों को ज्यादा महत्व मिलने का आरोप भी लगाया।
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विधायक ने 22 सितंबर को लिखे पत्र में कहा कि 2026-27 के खरीफ सीजन में इंडी तालुक सूखे से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शुरुआत में कुछ बारिश हुई थी, जिसके बाद किसानों ने कर्ज लेकर बीज और खाद खरीदी और फसल बोई। लेकिन समय पर बारिश नहीं होने से फसलें सूख गईं। यशवंतरायगौड़ा पाटील ने आगे कहा कि इंडी में केवल फसलों का संकट नहीं है, बल्कि लोगों और पशुओं के लिए पीने के पानी की कमी भी बनी हुई है। इसी वजह से उन्होंने क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग सरकार के सामने रखी थी।

सरकार के सामने विधायक ने क्या मांग रखी थी?
यशवंतरायगौड़ा पाटील ने बताया कि उन्होंने 28 अगस्त को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के सामने इंडी तालुक को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग रखी थी। उनका कहना है कि लगातार अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने के बावजूद इंडी को सूखाग्रस्त तालुकों की सूची में शामिल नहीं किया गया।
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विजयपुरा जिले में कुल 13 तालुक हैं, जिनमें से 11 को अब तक सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। पाटील ने कहा कि सिर्फ इंडी और चडचन तालुक इस सूची से बाहर रह गए हैं। राज्य स्तर पर अब तक 188 तालुक सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं। उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने मंगलवार को कहा था कि यह संख्या 177 तक पहुंच जाएगी और आने वाले दिनों में 200 तक भी जा सकती है। पहले चरण में 101 तालुक घोषित किए गए थे, इसके बाद 23 और फिर हाल में 53 तालुक इसमें जोड़े गए।

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विधायक ने इस्तीफे की वजह क्या बताई?
यशवंतरायगौड़ा पाटील ने अपने पत्र में कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक होने के नाते उन्होंने कई बार संयम के साथ सरकार के सामने अपनी बात रखी। उनका कहना था कि वह ऐसा इसलिए करते रहे ताकि सरकार को किसी तरह की असहज स्थिति का सामना न करना पड़े। लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि उनकी बात और भावनाओं को उचित महत्व नहीं दिया जा रहा है।

पाटील ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में प्रभावशाली लोगों और दबाव बनाने वालों को ज्यादा महत्व मिल रहा है, जबकि शांत और संयमित तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों की जायज मांगों पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसी के चलते उन्होंने विधायक पद से स्वेच्छा से इस्तीफा देने की बात कही।
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क्या पाटील पहले भी इस्तीफा दे चुके हैं?
हां। यशवंतरायगौड़ा पाटील इससे पहले भी विधायक पद से इस्तीफा दे चुके हैं। उनका पिछला इस्तीफा तीन अगस्त को सामने आया था। उस समय वह कर्नाटक मंत्रिमंडल के विस्तार में खुद को शामिल नहीं किए जाने से नाराज थे। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने उनसे बातचीत कर उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए मना लिया था।
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