कर्नाटक में चुनावी नतीजों के बाद जनता सरकार बनाने का रोमांच देख रही है। क्यों ना कांग्रेस-जेडीएस एक पाले में आकर बहुमत का सपना देख रहे हों लेकिन बीजेपी जिस तरह की बयानबाजी कर रही है उससे तो यही लग रहा है कि जोड़तोड़ की राजनीति को साधने में बीजेपी को ज्यादा दिक्कत नहीं है। तभी तो जितनी लकीरें कांग्रेस के माथे पर हैं उतना ही बीजेपी चुटीले बयान दे रही है।
कांग्रेस अपने विधायक दल को मजबूत बता रही है, तो जेडीएस बीजेपी के टूटने की बात करने लगी है। लेकिन बीजेपी है कि अपने बयानों से दोनों को चिढ़ाने में लगी है। इन परिस्थितियों में भी बीजेपी कांग्रेस-जेडीएस को अवसरवादी राजनीति का पाठ पढ़ा रही है।
अब देखना है कि बीजेपी जितना निश्चिंत दिखाई दे रही है, उसके लिए सरकार बनाना भी उतना आसान है कि नहीं। क्योंकि बयानबाजियों से तो ऐसा ही लग रहा है कि सूबे में बीजेपी अपनी राह तय कर चुकी है। बहुमत जुटाने के आंकड़ों पर भी बीजेपी आश्वस्त है। जिस तरह से कांग्रेस के 12 विधायकों के बैठक से दूर होने की हवा है, कयास यही लगाए जा रहे हैं कि वो बीजेपी के संपर्क में हैं।