कर्नाटक कांग्रेस के भीतर गुटीय जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी विधायक केएन राजन्ना ने आरोप लगाया है कि पार्टी में सीएम के समर्थकों को जानबूझकर हाशिए पर धकेला जा रहा है और मुख्यमंत्री किसी मजबूरी के चलते खामोश हैं। राजन्ना ने अल्पसंख्यक नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व पर तीखे सवाल दागे हैं।
कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर मची रार अब सरेआम हो चुकी है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेहद करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ विधायक केएन राजन्ना ने अपनी ही सरकार के मुखिया पर कई आरोप लगाए हैं। राजन्ना का सीधा आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस वक्त एक 'बेबस' स्थिति में हैं और किसी अज्ञात दबाव में काम कर रहे हैं। राजन्ना के मुताबिक, मुख्यमंत्री के करीबियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन वे चुप्पी साधे बैठे हैं।
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'अपनों को बचाने में नाकाम हैं सीएम?'
दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव के बाद कांग्रेस ने अल्पसंख्यक समुदाय के उन नेताओं पर गाज गिराई थी, जिन्हें सिद्धारमैया का वफादार माना जाता है। इसी कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए पूर्व मंत्री राजन्ना ने कहा, 'पार्टी में कुछ स्वार्थी तत्व उन लोगों के खिलाफ साजिश रच रहे हैं जो पार्टी के प्रति वफादार रहे हैं। हमें अपने मुख्यमंत्री से उम्मीद थी कि वे संकट के समय अपने लोगों के साथ मजबूती से खड़े होंगे, लेकिन उनका साथ न देना बेहद दुखद है।'
जब राजन्ना से पूछा गया कि आखिर सिद्धारमैया को बेबस किसने बनाया है, तो उन्होंने कहा, 'मैं नाम नहीं लूंगा, आप खुद समझदार हैं। लोग कह रहे हैं कि सिद्धारमैया के करीबियों को किनारे लगाया जा रहा है। पता नहीं उनकी क्या मजबूरी है, जो वे इस कदर तटस्थता दिखा रहे हैं।'
राजन्ना ने बिना नाम लिए डीके शिवकुमार पर साधा निशाना
राजन्ना ने पार्टी के भीतर अनुशासन के नाम पर जारी कार्रवाई को भी कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने बिना नाम लिए उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब कोई नेता राहुल गांधी का अपमान करने वालों के साथ मंच साझा करता है या विपक्षी मुख्यमंत्रियों की तारीफ करता है, तब उसे अनुशासनहीनता क्यों नहीं माना जाता? राजन्ना ने कहा कि शामनूर शिवशंकरप्पा जैसे दिग्गजों ने सार्वजनिक मंच से भाजपा के लिए वोट मांगे, लेकिन तब पार्टी नेतृत्व ने उन्हें एक मौखिक चेतावनी तक नहीं दी। फिर आज सिर्फ सिद्धारमैया के समर्थकों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है?