कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने शिवमोगा में हुए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के कार्यक्रम को प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया। इससे पहले, सीएम ने शिवमोगा में भारत के दूसरे सबसे लंबे केबल-आधारित सिगंदूर पुल के उद्घाटन का बहिष्कार किया था।
अपने पत्र में, कांग्रेस नेता ने दावा किया कि केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राज्य सरकार से परामर्श किए बिना शिवमोगा के सागर तालुका में कार्यक्रम आयोजित किया था। साथ ही यह भी कहा कि कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में उनका नाम बिना किसी पूर्व सूचना के छापा गया था। उन्होंने कहा कि राज्य की असहमति के बावजूद मंत्रालय द्वारा कार्यक्रम करना सरासर मनमानी है और सहकारी संघवाद की मूल भावना के विरुद्ध है।
दरअसल, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को शिवमोगा में सिगंदूर पुल समेत विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया था। सिद्धारमैया और उनके मंत्रिमंडल ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया था।
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11 जुलाई को गडकरी से फोन पर हुई थी बात
सिद्धारमैया ने कहा कि कार्यक्रम का पता चलने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से 11 जुलाई को फोन पर बात थी। इस दौरान उन्होंने गडकरी से कार्यक्रम को स्थगित करने का आग्रह किया था, क्योंकि उस दिन उनका विजयनगर जिले के इंडी तालुक में पहले से एक और कार्यक्रम तय था।
सिद्धारमैया का दावा- गडकरी ने कार्यक्रम स्थगित करने पर जताई थी सहमति
सिद्धारमैया ने दावा किया कि बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम को स्थगित करने पर सहमति जताई थी, लेकिन फिर भी 14 जुलाई को कार्यक्रम आयोजित किया गया। सिद्धारमैया ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा, 'मैं आपका ध्यान 14 जुलाई को शिवमोगा जिले के सागर तालुका स्थित नेहरू फील्ड में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आयोजित 2000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 88 किलोमीटर लंबी 9 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण समारोह की ओर आकर्षित करना चाहता हूं।'
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कार्यक्रम से पहले राज्य सरकार से नहीं किया परामर्श
सिद्धारमैया ने कहा कि मंत्रालय ने कार्यक्रम से पहले राज्य से परामर्श नहीं किया। साथ ही उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर फरीद और राज्य विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी के नामों से पहले पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का नाम छापा, जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, 'कर्नाटक सरकार इस तरह की असहयोगात्मक कार्रवाई के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराती है। मुझे उम्मीद है कि सभी केंद्रीय मंत्रालयों को भविष्य में इस तरह के विवादास्पद कार्यों से बचने की सख्त सलाह दी जाएगी।'
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सिद्धारमैया ने कहा- अधूरे पुल का उद्घाटन करना गलत
सिद्धारमैया ने आगे कहा कि एनएच 369ई पर शरावती बैकवाटर और अंबरगोडु व कलसावली के बीच ईपीसी मोड पर सिंगदूर पुल बनाने की योजना 2013 में राज्य सरकार ने बनाई थी, जिसे बाद में केंद्र ने आगे बढ़ाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार यह पुल अभी पूरी तरह से बना नहीं है, इसलिए इसका उद्घाटन करना गलत है।