कर्नाटक में पिछले पांच वर्षों में 3,350 से अधिक मातृ मृत्यु हुई हैं। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि के दौरान मृत्यु दर में गिरावट आई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोमवार को कहा कि बेल्लारी जिले में हाल ही में हुई मातृ मृत्यु को लेकर उठे विवाद के मद्देनजर ये डाटा जारी किया गया है। सीएमओ ने कहा, आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कोविड-19 के दौरान सबसे अधिक मातृ मृत्यु भाजपा के शासनकाल में हुई थी।
मातृ मृत्यु की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित, बेल्लारी का आंकड़ा पांच तक पहुंचा
कर्नाटक में मातृ मृत्यु के आंकड़ों के अनुसार बीते पांच साल की अवधि के दौरान कर्नाटक का मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) प्रति एक लाख बच्चों के जन्म पर 64 है। गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने रविवार को बेल्लारी अस्पताल और राज्य भर के अन्य स्थानों पर मातृ मृत्यु की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की है। नवंबर के बाद से बेल्लारी में मातृ मृत्यु की कुल संख्या पांच तक पहुंच गई है।
| साल |
मातृ मृत्यु |
| 2019-20 |
662 |
| 2020-21 |
714 |
| 2021-22 |
595 |
| 2022-23 |
527 |
| 2023-24 |
518 |
सीएम सिद्धारमैया ने कहा, दोषियों पर कार्रवाई करेगी सरकार
अब इस साल के नवंबर 2024 तक कर्नाटक में मातृ मृत्यु की संख्या 348 तक पहुंच चुकी है। विगत सात दिसंबर को राज्य सरकार ने कर्नाटक के बेल्लारी में करीब एक महीने के अंदर मातृ मृत्यु का आंकड़ा बढ़कर पांच तक पहुंचने के मामले का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि वह इस मामले में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे।
नवंबर में चार महिलाओं की मौत
गौरतलब है कि नवंबर में बेल्लारी में बच्चों को जन्म देने वाली चार महिलाओं की मौत हुई थी। अब बेल्लारी मेडिकल कॉलेज एवं रिसर्च सेंटर में गुरुवार रात को एक और महिला की मौत हुई। इन सभी मामलों की जांच विकास आयुक्त के नेतृत्व में एक एक्सपर्ट कमेटी की तरफ से की जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बेल्लारी का दौरा कर जानकारी ली
सिद्धारमैया ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "अब तक पांच मौतें हो चुकी हैं। जब यह आंकड़ा चार पर था, तब मैंने बैठक की थी। हमने इसके बारे में कल मंत्रिमंडल की बैठक में भी बात की। स्वास्थ्य मंत्री (दिनेश गुंडू राव) आज बेल्लारी का दौरा कर रहे हैं। उनके साथ स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी भी हैं।"
इंजेक्शन की खराब गुणवत्ता हो सकता है अहम कारण
सिद्धारमैया ने बताया कि यह मातृ मृत्यु के मामले रिंगर लैक्टेट सॉल्यूशन (मांओं में कम खून या कम रक्तचाप पर दिया जाने वाला इंजेक्शन) की खराब गुणवत्ता के कारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही ड्रग कंट्रोलर को निलंबित कर दिया है और सॉल्यूशन देने वाली कंपनी को भी निलंबित कर दिया है। उन्होंने कहा कि हम पहले ही कई कार्रवाई कर चुके हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई भी की जाएगी। गौरतलब है कि सीएम ने विगत 30 नवंबर को इन मामलों के मद्देनजर एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। तब उन्होंने इन मौतों को लेकर एक जांच बिठा दी थी।
भाजपा ने सिद्धारमैया सरकार को घेरा
सात दिसंबर को मातृ मृत्यु का आंकड़ा बढ़ने की खबर सामने आने के बाद पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु के नेतृत्व में भाजपा ने बेल्लारी में प्रदर्शन भी किया। उन्होंने सरकार पर मातृ मृत्यु के मामलों को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया। स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडु राव पर निशाना साधते हुए श्रीरामुलु ने कहा कि मंत्री आज सिर्फ सरकार की इज्जत बचाने के लिए बेल्लारी आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मामले को बेलगावी में होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान उठाएगा। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि ऐसी घटनाएं आगे न हों। उन्होंने पूछा- क्या दो लाख रुपये का मुआवजा काफी है? इस तरह की मौतों पर रोक लगनी चाहिए। हर एक पीड़िता के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।