फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चमत्कार या बीमारी? मंगलुरु में गाय ने दो सिर और चार आखों वाले बछ़डे को दिया जन्म, देखने वालों की उमड़ी भीड़

Thu, 19 Sep 2024 02:59 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलूरू

सार

मंगलूरू के मुल्की तालुक के किन्निगोली क्षेत्र में एक दुर्लभ घटना सामने आई है, जहां एक गाय ने दो सिर वाले बछड़े को जन्म दिया। जिसके देखने वालों की अब भीड़ उमड़ रही है।
विज्ञापन
कर्नाटक में पैदा हुआ दो सिर का बछड़ा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कर्नाटक के मंगलूरू से एक बेहद ही दुर्लभ घटना सामने आई है। मंगलूरू के किन्निगोली इलाके में दो सिर वाला बछड़ा पैदा हुआ है। स्थानीय लोगों से लेकर पशु चिकित्सक तक इस दुर्लभ घटना से हैरान हैं। बताया जा रहा है  यह बछड़ा फिलहाल स्वस्थ है, हालांकि इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। 
विज्ञापन

 
इस विचित्र बछड़े को जन्म देने वाली गाय के मालिक जयराम जोगी ने कहा कि बछड़ा मंगलवार को पैदा हुआ था और गाय ने अपने इस विचित्र बछड़े को स्वीकार नहीं कर रही है। जिसके चलते बछड़े ने अभी तक गाय से दूध पीना शुरू नहीं किया है और उसे बोतल से दूध पिलाया जा रहा है।

इस बीमारी के चलते बन गए 2 सिर
बछड़े के दो सिर होने के पीछे की वजह 'पॉलीसेफली' नामक एक दुर्लभ बीमारी है। इस विशेष बछड़े के दोनों सिर आपस में जुड़े हुए हैं, जो एक ही गर्दन से जुड़े हुए हैं। उसकी चार आँखें हैं, लेकिन केवल बाहर वाली आखें से देख पा रहा है, जबकि बीच की दो आँखें काम नहीं करती हैं। बछड़े को कई और भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।   सिर के वजन के कारण बछड़ा खड़ा नहीं हो पाता है। जिसके कारण उसे बोतल से दूध पिलाना पड़ता है। 
विज्ञापन


सिर का वजन बछड़े के लिए बना मुसीबत
मुल्की तालुक के दुजलागुड़ी निवासी जयरामा जोगी का कहना है कि, दो सिरों के कारण बछड़े को खड़ा करने में दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि वह सिर से वजन के चलते संतुलन नहीं बना पा रहा है। एक स्थानीय पशु चिकित्सक ने बछड़े की जांच की और पुष्टि की है कि, वह अभी स्वस्थ है। हालांकि, बछड़े का लंबे समय तक जीवित रहना इस बात पर निर्भर करेगा कि उसकी किस तरह से देखभाल की जाती हैं। आमतौर पर पॉलीसेफलिक बछड़े अक्सर मृत पैदा होते हैं या बहुत कम समय तक जीवित रहते हैं, लेकिन इस बछड़े की स्थिति अभी अच्छी जोकि किसी आश्चर्य से कम नहीं है। 

बछड़े को जिंदा रखने की हर संभव कोशिश 
हालांकि बछड़े के मालिक का परिवार उसके बचने की पूरी उम्मीद लगाए हुए है। जयराम का पूरा परिवार बछड़े को सहज बनाने और खुद से चलने-फिरने में सक्षम बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। हालांकि, मुल्की तालुक के पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगर बछड़ा दूध पीते समय सामान्य तरीके से दूध पीता है, तो उसके लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना है।  
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें