बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता बानू मुश्ताक इस साल विश्व प्रसिद्ध मैसूर दशहरा उत्सव का उद्घाटन करेंगी। यह उत्सव पारंपरिक तौर पर चामुंडी पहाड़ी मंदिर में धार्मिक आयोजन से शुरू होता है। यही वजह है कि बानू मुश्ताक द्वारा इसके आयोजन पर विवाद हो गया है। भाजपा ने एक धार्मिक आयोजन में समान आस्था वाले व्यक्ति को आमंत्रित करने की मांग की है। हालांकि मैसूर राजघराने के प्रमुख और मैसूर से भाजपा सांसद यदुवीर कृष्णदत्ता वाडियार का इस मुद्दे पर अलग मानना है। वाडियार ने कहा कि बानू मुश्ताक एक सम्मानित हस्ती हैं और दशहरा उत्सव का उद्घाटन करने के लिए उपयुक्त हैं। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि दशहरा उत्सव एक धार्मिक आयोजन है और इसके लिए मुख्य अतिथि को आमंत्रित करते हुए लोगों की भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए था।
वाडियार ने की बानू मुश्ताक की तारीफ
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मैसूर सांसद वाडियार ने कहा कि राज्य भाजपा और मैंने, इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि दशहरा उत्सव एक धार्मिक त्योहार है और आमतौर पर लोग यही चाहेंगे कि समान धार्मिक भावना वाले लोग ही इसकी शुरुआत करें क्योंकि वे इन धार्मिक मानदंडों का पालन करते हैं और इन्हें समझते हैं। भाजपा सांसद ने बानू मुश्ताक की तारीफ भी की और कहा कि उन्होंने बहुत सारे सामाजिक कार्य किए हैं। खासकर मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश की अनुमति और मुस्लिम महिलाओं के उत्थान से जुड़े काम प्रमुख हैं।
'यह राज्य सरकार का आयोजन, लेकिन लोगों की आस्था का ध्यान रखा जाना चाहिए'
वाडियार ने ये भी कहा कि 'मैंने व्यक्तिगत रूप से हमेशा महसूस किया है कि राज्य सरकार द्वारा आयोजित किया जाने वाला दशहरा उत्सव, एक धर्मनिरपेक्ष ढांचे के तहत होता है और इससे जुड़े सभी धार्मिक अनुष्ठान और पूजा मेरे परिवार द्वारा मैसूर स्थित हमारे निजी घराने में आयोजित किए जाते हैं। हालांकि इस उत्सव की पृष्ठभूमि और इस तथ्त को देखते हुए कि इस आयोजन के आखिरी दिन मां चामुंडेश्वरी की मूर्ति स्थापित की जाती है। ये मामले निश्चित रूप से बेहद भावनात्मक होते हैं और इससे जुड़े फैसले लेने में लोगों की भावनाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।'
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पूर्व में भी मुस्लिम हस्तियों को किया जा चुका आमंत्रित
गौरतलब है कि साल 2017 में भी प्रसिद्ध कवि और कन्नड़ लेखक के.एस.निसार अहमद ने मैसूर दशहरा उत्सव का उद्घाटन किया था। वाडियार ने कहा कि अब बानू मुश्ताक को बुलाकर उन्हें मना करना उनका अपमान होगा। ऐसे में मैं ये राज्य पर छोड़ता हूं कि वे इस पर क्या करते हैं या उनकी क्या प्रतिक्रिया होती है।
कर्नाटक सरकार की दो टूक
कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने इस बात पर जोर दिया कि यह एक राज्य उत्सव है और इसमें सभी को आमंत्रित किया जाएगा, साथ ही उन्होंने आगाह किया कि इसमें धर्म को न लाया जाए। उन्होंने कहा कि अतीत में, निसार अहमद ने मैसूर में उत्सव का उद्घाटन किया था। मिर्जा इस्माइल मैसूर के दीवान थे। इसका विरोध करना उचित नहीं है। यह एक राजकीय उत्सव है। हमें इसमें धर्म को शामिल करने की जरूरत नहीं है। कई लोग इसे एक धार्मिक आयोजन मानते हैं, लेकिन यह एक राजकीय उत्सव है। आप इसमें धर्म को क्यों मिला रहे हैं? क्या इसे किसी एक समुदाय को छोड़कर आयोजित किया जाना चाहिए? चाहे वह किसी चीज में विश्वास करती हो या नहीं, यह एक राजकीय उत्सव है और हम सभी को आमंत्रित करेंगे।'